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क्यों चीन के कर्ज में डूब गए ये देश, क्या है विस्तारवादी नीति?

चीन की विस्तारवादी नीतियाँ किसी से छिपी नहीं है। आज एशिया के हर किसी देश क साथ चीन का सीमा विवाद(Border Dispute) चल रहा है।

China Border Expansion Policy
China Border Expansion Policy

चीन ने अपने कर्ज जाल (Debt trap) मे की देशों को फसाकर अपना उल्लू सीधा किया है। यह चीन की सुपर पावर बनने की नीति मे महत्वपूर्ण कदम है।

कौन कौन से देश हुए हैं चीन के कर्ज जाल का शिकार

एशिया के अधिकतर देश चीन के कर्ज जाल में फँस चुके हैं या फँसने जा रहे हैं। हाल ही में लाओस एक नया देश बन गया है जो चीन के कर्ज जाल में फँस चुका है। लाओस एक स्थलरूद्ध (Landlocked) देश है जिसकी सीमाएँ चीन, वियतनाम, कंबोडिया, तथा म्यांमार के साथ लगती है। कुछ समय पहले लाओस ने विद्युत परियोजना हेतु चीन से लोन लिया था जिसका उद्देश्य लाओस को एशिया की बैटरी बनाना था लेकिन अब कर्ज इतना बढ़ गया है की जिस पावर ग्रिड को लाओस चीन की सहायता से विकसित करना चाहता था वही नैशनल पावर ग्रिड चीन को सौंपना पड़ा क्यों की चीन द्वारा दिया गया लोन अब इनकी जीडीपी का 26 प्रतिशत हो गया है।

इससे पहले श्री लंका, पाकिस्तान,मालदीव भी ऐसे देश है जो चीन के कर्ज जाल मे फँसे हुए हैं। सब से आश्चर्यजनक बात यह है कि इन देशों ने चीन से इतने लोन लिए हुए हैं कि उन लोन को चुकाने के लिए भी ये चीन से दुबारा कर्ज लेते है। पाकिस्तान ने हाल ही अपना पहला कर्ज उतारने के लिए जुलाई-अप्रैल में 6.5 अरब डॉलर का लोन चीन से लिया था। इसी प्रकार श्रीलंका भी अपने कर्ज को उतारने के लिए चीन से और कर्ज लेगा। पाकिस्तान तथा श्री लंका अपना कर्ज चुका पाने में असमर्थ है इसलिए पाकिस्तान ने अपना ग्वादर बंदरगाह 40 सालों के लिए चीन को दे दिया है। इसी के साथ पाकिस्तान ने कुछ विशेष अधिकार भी चीन को दिए हुए हैं जैसे हॉलिडे टैक्स अर्थात जो भी चीन निवेश करता है तथा जो भी उससे फायदा होता है उसके ऊपर कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा साथ ही इसमें जो भी लाभ होगा उसका 91 प्रतिशत चीन को दिया जायेगा। इसी प्रकार श्री लंका ने अपना हंबनटोटा पोर्ट तथा उसके आसपास की 6000 हेक्टेयर की भूमि चीन को 99 वर्षों के लिए चीन को दे दी है। इससे देखा जा सकता है कि श्रीलंका तथा पाकिस्तान किस तरह चीन के जाल मे फँस चुके हैं।

इसके अलावा मध्य एशियाई देश(Central Asian Country) तजाकिस्तान ने चीन से 2006 में लोन लिया था जो बढ़कर इतना हो गया है की अब तजाकिस्तान की संसद को एक बिल पास करना पड़ा जिसमे उन्होंने पामीर पठार के आसपास की लगभग 1150 km जमीन चीन को देनी पड़ी। यह क्षेत्र खनिज संपदा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। चीन ने यहाँ से सोने तथा चांदी(gold and silver mining) का निष्कासन किया था। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार तजाकिस्तान महामारी के बावजूद चीन के एक्सिम बैंक को लोन चुका रहा है। इसी के साथ तजाकिस्तान चीन से अपना थोड़ा बहुत कर्ज माफ करने के लिए भी आग्रह कर रहा है लेकिन चीन इसके लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। इसी प्रकार किरगिस्तान भी चीन के जाल मे फँसा हुआ है। किरगिस्तान में चल रही राजनीतिक अस्थिरता के कारण किरगिस्तान ने भी चीन से कर्जमाफ़ी के लिए आग्रह किया था पर चीन ने इस दिशा में भी कोई कदम नहीं उठाया। इसी तरह मध्य एशिया के अनेक देश इस कुचक्र में फँस चुके हैं।

इसी प्रकार अफ्रीकी देश ज़ाम्बिया,केन्या,मोज़ाम्बिक,एथोपिया,केमरून, अंगोला,कांगो भी चीन के कर्ज जाल मे फँसे हुए हैं। इन देशों ने चीन से आग्रह किया था कि जब तक कोरोना महामारी चल रही है तब तक हम कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं पर चीन ने इस पर भी कोई कदम नहीं उठाया।

क्यूँ लेते है चीन से कर्ज

देशों के पास अपने विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कर्ज लेने के दो विकल्प है या तो वे किसी अन्य देश से कर्ज ले सकते है तथा दूसरा IMF( International Monetary Fund).

क्योंकि IMF से जो कर्ज लिया जाता है उसमे काफी संगीन शर्तें होती हैं। मसलन IMF देखता है कि कर्ज लिए हुए पैसों को कहाँ लगाया जा रहा है, उस पैसे का क्या हो रहा है साथ ही आईएमएफ़ यह भी देखता है कि कोई देश लोन लेने के बाद मुश्किल में न चला जाए। परंतु यदि किसी देश से कर्ज लिया जाता है तो यह सब नहीं देखा जाता। ऐसे मे चीन इन देशों की पहचान कर उनको कर्ज देता है ताकि बाद मे उस देश की संपत्ति को हासिल किया जा सके। देशों को चीन से पैसे लेना आसान लगता है। इसलिए ज्यादातर देश चीन से लोन लेते हैं।

मालदीव ने भी चीन से काफी लोन लिए थे। साथ ही मालदीव ने चीन को उस लोन के ऊपर गारंटी दी थी कि यदि कोई व्यक्ति या कंपनी चीन का कर्ज लौटाने में असमर्थ होगी तो मालदीव की सरकार वो कर्ज चुकाएगी। इसी के चलते मालदीव को अपने कुछ द्वीप चीन को सोपने पड़े थे। परंतु भारत ने समय पर मालदीव की मदद की थी। भारत ने मालदीव को सांत्वना दी थी कि अगर उन्हे लोन की जरूरत है तो उसे भारत से लें और उन्हे लोन के साथ इतनी शर्त नहीं मिलेगी। लेकिन भारत ऐसा हर देश के साथ ऐसा नहीं कर पाएगा।

निष्कर्ष

चीन की विस्तारवादी नीतियों में उसकी कर्ज जाल (Debt trap) अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन खुद को विश्वशक्ति(World Power) स्थापित करने में तत्पर है। ऐसे में चीन कुछ भी करने को तैयार है। चीन दूसरे देशों को कमजोर करके खुद ताकतवर बनना चाहता है। लाओस के केस में वहाँ पर्यावर्णीय खतरे (environmental securities) तथा समावेशी विकास(Sustainable Development) में मुश्किल आएगी। साथ ही भविष्य मे सीमा विवाद भी हो सकता है। लाओस जैसे छोटे से देश मे जहां की आबादी 70 लाख है। इसमें चीन के पास शक्ति है कि वह जब चाहे लाओस की बिजली बंद कर सकते हैँ। इसी प्रकार चीन विभिन्न देशों को किसी न किसी माध्यम से कमजोर कर के वहाँ की खनिज संपदा तथा भूमि पर पर अधिकार जमाता है। इस समय विश्व के समस्त देशों को इस और अपना ध्यान लाने की जरूरत है।

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