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हरियाली सावन तीज – A Festival of Teej 2021

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Teej क्या है? हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है, इसकी कहानी

हम सब जानते ही हैं भारत त्योहारों का देश है । हिंदू धर्म के मुख्य त्योहारों में teej का त्यौहार भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता हैं।Teej को हिंदू धर्म में अन्य कई नामों से भी जाना जाता है जैसे हरियाली तीज, हरितालिका व्रत, सावन तीज इत्यादि ।
यह त्यौहार बच्चों व महिलाओं द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आइए जानते हैं Teej त्यौहार के बारें में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

teej festival in hindi. तीज का त्योहार क्यों मानते है ।
तीज

तीज का त्यौहार कब मनाया जाता हैं ?

वैसे तो teej हर महीने ही आती हैं मगर साल भर में एक महीना ऐसा आता हैं जो कि Teej को त्यौहार का रूप दे जाता हैं वो हैं सावन। सावन का पूरा महीना ही अपने आप में एक त्यौहार होता हैं। इसीलिए इस महीने आने वाली शुक्ल पक्ष की तृतीया को त्यौहार के रूप में मनाया जाता हैं! इस साल 2021 में तीज का त्यौहार 11 अगस्त दिन बुधवार को मनाया जाएगा।यह त्यौहार उतर भारत के साथ-साथ नेपाल में भी पूरे धूमधाम से मनाया जाता है।

तीज के त्यौहार को कैसे मनाएँ ?

हिंदू सभ्यता में हर त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसी प्रकार तीज के त्यौहार का जश्न भी कुछ अलग अंदाज़ में होता है ।

इस दिन महिलाएँ सोलह श्रृंगार करके तैयार होती हैं और पारंपरिक कपड़े पहनती हैं। महिलाओं द्वारा अपने हाथों और पैरों को मेहंदी के बूटों से सजाया जाता हैं। इस दिन महिलाएँ अपने परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं। कुछ महिलाएँ इस दिन अपने मायके जाती है और रक्षा बंधन तक वहाँ रूकतीं हैं।

इस दिन झूला-झूलने का भी रिवाज है। जगह-जगह झूले डाले जाते हैं। इस त्यौहार में स्त्रियां हरी लहरिया के साथ-साथ लाल, गुलाबी चुनरी में भी सजती हैं, गीत गाती हैं, नाचती हैं। हरियाली तीज के दिन अनेक स्थानों पर मेले भी लगते हैं और बच्चे और बड़े हर्षोल्लास के साथ मेले का आनंद लेते हैं ।माता पार्वती की सवारी बड़े ही धूमधाम से निकाली जाती है।जिसका जूलुस पूरे गाँव शहर में देखने लायक़ होता हैं।

तीज के त्यौहार की पूजा विधि

इस दिन निर्जला व्रत कर भगवान शिव व माता पार्वती की प्रतिमा का विधान होता हैं। महिलाएँ सुबह सोलह श्रृंगार कर निर्जला व्रत करती हैं।भगवान शिव व माता पार्वती की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजन में सुहाग की सभी सामिग्री एकत्रित कर थाली में सजाकर माता पार्वती को चढ़ायी जाती हैं तत्पश्चात् माता की कथा सुनी जाती हैं।


यह व्रत करने से पति की दीर्घायु ,व संतान प्राप्ति का वरदान प्राप्त होता हैं। विवाहित महिलाओं के मायके से श्रृंगार का सामान व मिठाइयाँ भेजी जाती हैं। कुँवारी लड़कियाँ भी मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत कर माता पार्वती की पूजा करती है।

यह व्रत करवा-चौथ से भी कठिन माना जाता हैं क्योंकि इस दिन महिलाएँ बिना जल-अन्न के व्रत करती हैं और दूसरे दिन नहा कर पूजा के बाद ही व्रत पूरा करके अन्न ग्रहण किया जाता है । तत्पश्चात् उत्सव मनाया जाता हैं,नृत्य किया जाता हैं और भजन-श्लोक गीत गाए जाते है।

तीज का त्यौहार क्यों मनाया जाता है ?

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए 107 जन्मों तक कठिन तपस्या की। माँ पार्वती के 108वें जन्म में भगवान शिव ने उनकी कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को माँ पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया ।

तभी से इस त्यौहार को मनाने की प्रथा चली आ रही हैं।महिलाएँ इस दिन का पूरा साल इंतज़ार करती हैं क्योंकि यह त्यौहार पति-पत्नी के मज़बूत रिश्ते का प्रतीक है और पति की दीर्घायु के लिए इस दिन व्रत करना बहुत ही शुभ माना जाता है ।

तीज के प्रकार

तीज को बहुत से नामों से जाना जाता हैं जैसे कजरी तीज, हरितालिका तीज, हरियाली तीज। ये तीनों की Teej पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखना और उनके अखंड सौभाग्य के लिए प्रार्थना करने के लिए मनायी जाती हैं।लेकिन समानताओं के साथ-साथ इनके पीछे बहुत से कारण भी हैं जो Teej को विभिन्न प्रकारों में विभाजित करते हैं।आइए जानते हैं तीज के विभिन्न प्रकारों के बारे में—

हरियाली तीज

ये पर्व सावन मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रख भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन शिवजी ने देवी पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसी कारण हरियाली तीज का व्रत सुहागिन स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य का वरदान देने वाला माना गया है।महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु के लिए कठिन निर्जला व्रत करती हैं ।इस दिन महिलाएँ चंद्रमा की पूजा करती हैं ।

कजरी तीज

कजरी तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन मनाई जाती है। जिसे कजली तीज और भादो teej के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को भी महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र करने के लिए रखती है।पौराणिक मान्यता है कि मध्य भारत में कजली नाम का एक वन था।

एक बार वहां के राजा की असमय मृत्यु हो गई और इसके वियोग में रानी ने खुद को सती कर लिया। इस घटना से वहां के लोग इतने दुखी हो गए, लेकिन राजा-रानी के प्रेम से इतना प्रभावित हुए कि वे लोग कजली गीत गाने लगे थे। ये गीत पति-पत्नी के प्रेम का प्रतीक होता था। कजरी teej मनाने की परंपरा यहीं से शुरू हुई। इस दिन महिलाएँ नीम के पेड़ की पूजा करती है।

हरतालिका तीज

सुहागिन स्त्रियां अपने सुहाग को बनाए रखने और अविवाहित युवतियां मन मुताबिक वर पाने के लिए हरतालिका तीज का कठिन व्रत रखती हैं। मान्यता है कि मां पार्वती ने भगवान शिवजी को वर रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तप किया व बालू के शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया था जिससे प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया ।

ऐसी मान्यता है कि माता ने जब यह व्रत किया था, तब भाद्रपद की तीज तिथि थी व हस्त नक्षत्र था। बाद में राजा हिमालय ने भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह कराया। तभी से हरितालिका teej मनाने की प्रथा शुरू गई।हरतालिका teej पर महिलाएं सुंदर मंडप सजाकर बालू से शिव जी और पार्वती जी की प्रतिमा बनाकर उनका गठबंधन करती हैं और उनकी प्रतिमा की पूजा करती है।

तीज पर कविता

“आया आया आया देखो तीज का त्यौहार,
लाया लाया लाया देखो ख़ुशियाँ ये अपार,
महिलाओं के दिल जैसे मग्न हुए,
बच्चों के कदम जैसे चहक उठे,
हरियाली ही हरियाली छायी देखो चारों ही द्वार,
आया आया आया देखो teej का त्यौहार,
लाया लाया लाया देखो ख़ुशियाँ ये अपार,
पेड़ों के नीचे देखो झूले लगे,
बच्चों और बड़ें भी झूलने लगे,
दिलों में सबके उमड़ा बेशुमार प्यार,
सावन लाया जब से उमंग भरी बहार,
आया आया आया देखो तीज का त्यौहार,
लाया लाया लाया देखो ख़ुशियाँ ये अपार।।”

निष्कर्ष

तीज के त्यौहार के समय सब जगह हरियाली ही हरियाली होती है और यह त्यौहारमहिलाओं में प्रेम और उमंग को भर देता हैं।बच्चें और बड़े भी हर्ष और उल्लास के साथ यह त्यौहार मनाते हैं।यह त्यौहार वर-वधू के पवित्र रिश्ते की मज़बूती को दर्शाता है ।भारत में राज्यस्थान के जयपुर शहर की teej बहुत ही प्रसिद्ध है। हिंदुओं के अनुसार teej के बाद से ही सभी त्योहारों का आगमन होता है।

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