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आखिर क्यूँ योगी आदित्यनाथ ने हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर रखने को कहा ?

हाल ही मे योगी आदित्यनाथ हैदराबाद निकाय चुनाव ( Hyderabad Civic Polls) प्रचार के लिए हैदराबाद पहुंचे जहां उन्होंने हैदराबाद का नाम बदलकर भाग्यनगर रखने की बात कही।

भाग्यलक्ष्मी मंदिर
भाग्यलक्ष्मी मंदिर

भाग्यनगर क्या है?

भाग्यनगर एक माता भाग्य लक्ष्मी का मंदिर है जो 16वीं शताब्दी में बनें स्मारक चारमीनार के एक कोने पर स्थित है। यह छोटा सा मंदिर यहाँ के हिन्दुओ की आस्था का केंद्र है। दीवाली तथा अन्य त्यौहारों पर इस मंदिर में बहुत भीड़ देखने को मिलती है। अभी इस मंदिर के उत्पत्ति का अभी पता नहीं है जबकि भारत के अभिलेखीय सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) के अनुसार यह मंदिर 1960 में बना था। अभी इस मंदिर का प्रबंधन ASI तथा एक हिन्दू ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है।

अभी यह मंदिर बहुत छोटा है परंतु कई बार इस मंदिर के विस्तार के लिए प्रयास किए गए हैं। साथ ही ASI की वेबसाईट के अनुसार, यह एक अवैध निर्माण है। हाईकोर्ट ने इस मंदिर के विषय में कहा था की इस मंदिर को तोड़ नहीं जाएगा साथ ही इसका विस्तार भी नहीं किया जाएगा।

भाजपा के सिकंदराबाद से सांसद जी. किशन रेड्डी के अनुसार यह मंदिर चारमीनार से भी ज्यादा पुराना है तथा यह मंदिर 1591 से भी पुराना है।

यह मंदिर पहले भी विवादों में रहा है। 1979 में मक्का मस्जिद पर हमले के बाद जब चारमीनार को बंद कर दिया था जो की हिन्दू श्रद्धालुओं ने खुलवाने का आग्रह किया था तब इस मंदिर को तोड़ दिया गया था। सितंबर 1983 में गणेश चतुर्थी का समय भी यह कुछ सांप्रदायिक विवाद हुए थे क्यों कि उस वक्त इस मंदिर के विस्तार की कोशिशी की गई थी। नवंबर 2012 में भी इस मंदिर मे बांस की जगह शीट्स लगा दी गई थी तो ऐसा देखा गया की इस मंदिर को स्थायी करने की कोशिश की जा रही है उस वक्त भी कुछ सांप्रदायिक विवाद देखने को मिले थे। तब आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला दिया था की इस मंदिर में किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं है।

इससे पहले भी योगी आदित्यनाथ ने कई जगहों के नाम बदले है जेसे इलाहाबाद का नाम प्रयागराज, फैजाबाद जिले का नाम अयोध्या, मांडवी रेलवे स्टेशन का नाम बनारस रेलवे स्टेशन,नोगढ़ रेलवे स्टेशन का नाम सिद्धार्थ नगर रेलवे स्टेशन रखा था।

कैसे हुआ था हैदराबाद का भारत में विलय

हैदराबाद का भारत में विलय 17 सितंबर 1948 को हुआ था जो बहुत चुनौतियों से भरा था। जब भारत आजाद हुआ तो 562 रियासतों में से 3 रिसायतों जूनागढ़, कश्मीर तथा हैदराबाद ने भारत मे शामिल होने से इनकार कर दिया था।  ये तीनों अलग राष्ट्र बनाना कहते थे। हैदराबाद का क्षेत्रफल इंग्लैंड तथा स्कॉटलेंड के कुल क्षेत्रफल से भी अधिक था।

 हैदराबाद के निजाम ओसमान अली खान आसिफ ने फैसला किया कि उनका रजवाड़ा न ही भारत और न पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा। अंग्रेजों ने निजाम को भारत या पाकिस्तान  से किसी एक में शामिल होने का प्रस्ताव दिया तथा अंग्रेजों ने हैदराबाद को स्वतंत्र राज्य बने राहने का भी सुझाव दिया। हैदराबाद में निजाम और सेना में ऊँचे पदों पर मुस्लिम थे लेकिन वहां वहुसंख्यक हिन्दू थे. निजाम ने ब्रिटिश सरकार से हैदराबाद को राष्ट्रमंडल देशों के अंर्तगत स्वतंत्र राजतंत्र का दर्जा देने का आग्रह किया. लेकिन ब्रिटिश निजाम के इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुए

हैदराबाद के निजाम के ना करने के बाद भारत के गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने उनसे भारत में विलय का आग्रह किया. लेकिन निजाम ने पटेल के आग्रह को खारिज करते हुए 15 अगस्त 1947 को हैदराबाद को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया था। हैदराबाद के निजाम के इस कदम से वल्लभ भाई पटेल चौंक गए और उन्होंने उस समय के गर्वनर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन से संपर्क किया। माउंटबेटन ने पटेल को सलाह दी कि इस चुनौती को भारत बिना बल के निपटे. प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू इस मसले का शांतिपूर्ण समाधान करना चाहते थे. लेकिन पटेल जानते थे कि इसका मसले का शांतिपूर्ण निपटारा होना असंभव है।

इसके बाद हैदराबाद के निजाम हथियार खरीदने तथा पाकिस्तान का सहयोग प्राप्त करने के प्रयासों मे जुट गए। सरदार पटेल को जैसे ही इस बात के बारे में पता लगा तब उन्होंने कहा कि, “हैदराबाद भारत के पेट में कैंसर के समान है और इसका समाधान सर्जरी से ही होगा” इसके बाद भारत ने हैदराबाद पर हमला करने की रणनीति बनाई क्योंकि अब भारत के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था तो हैदराबाद पर कार्रवाई का फैसला किया गया। 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ने हैदराबाद पर हमला कर दिया। भारतीय सेना की इस कार्रवाई को ऑपरेशन पोलो के नाम से जाना जाता है क्योंकि उस समय हैदराबाद में विश्व में सबसे ज्यादा 17 पोलो के मैदान थे।  भारतीय सेना का नेतृत्व मेजर जनरल जेएन चौधरी कर रहे थे। भारतीय सेना को पहले और दूसरे दिन परेशानी हुई और फिर विरोधी सेना ने हार गई। 17 सितम्बर की शाम को हैदराबाद की सेना ने भारतीय सेना के सामने हथियार डाल दिए इस प्रकार हैदराबाद का भारत में विलय हुआ। ।

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