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Raksha Bandhan 2021 : रक्षाबंधन या राखी क्यों मनाया जाती है ? जानें इसका इतिहास

हम सब जानते हैं कि रक्षाबंधन का त्यौहार आने वाला हैं और हम आपको बता दे कि इस त्योहार के लिए हम बहुत ही उत्सुक रहते है क्योंकि इस दिन हमें अपने भाई-बहन से मिलने का अवसर प्राप्त होता हैं। Raksha Bandhan का त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते को दर्शाता है। तो आइए हम आपको बताते हैं इस त्योहार की महत्वता के बारें में कुछ महत्वपूर्ण बाते।

एक बंधन भाई-बहन के रिश्ते का – Raksha Bandhan 2021

रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है ? रक्षा बंधन आने वाला है, ये सुनकर ही सभी बहनों में ख़ुशी की लहर झलकने लगती है। परन्तु बहुत सी बहन भाइयो को इसके पीछे की स्टोरी या इतिहास नही पता होगा।

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ऐसा शायद ही हो की आप को रक्षाबंधन का अर्थ क्या है और इससे कैसे मनाया जाता है, नही पता हो

भाई बहन की एक अलग ही Bonding होती है, पूरी दुनिया में इस रिश्ते को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, भारत के साथ साथ नेपाल और अन्य देशो में भी इसे मनाया जाता है।

यह पर्व राखी या Raksha Bandhan श्रावण माह के पूर्णिमा को मनाया जाता है। जो की अक्सर अगस्त के महीने ही आता है।

रक्षाबंधन का त्योहार कैसे मनाया जाता हैं?

यूँ तो भाई-बहन का प्यार किसी दिन का मोहताज नही हैं फिर भी हिंदुओं की मान्यता एवं पौराणिक कथाओं के आधार पर यह एक दिन भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक माना गया हैं। Raksha Bandhan पूरे भारतवर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है। सभी का ह्रदय ख़ुशियों से भरा होता है।

Raksha Bandhan के दिन बहनें सज-धज कर नए वस्त्र पहन कर और हाथों में भाई के नाम की मेहंदी लगा कर तैयार होती हैं और पूजा की थाली लेकर अपने भाई की पूजा करती हैं, सिंदूर का तिलक कर के चावल लगाया जाता है, उसके बाद बहन अपने भाई की दाहिनी कलाई पर रेशम का धागा या राखी बाँधती हैं और वचन लेती हैं कि भाई उम्र भर उसकी रक्षा करेगा। बहने अपने भाई की लंबी उम्र की कामना करती है।

भाई भी वचन स्वरूप उपहार अपनी बहन को देता हैं और इससे रिश्ता और अधिक अटूट बनता हैं, तत्पश्चात मिठाइयों का सेवन किया जाता है।

2021 में राखी का त्योहार कब मनाया जाएगा/शुभ मुहूर्त

हिंदुत्व के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। श्रावण की पूर्णिमा को मनाए जाने के कारण इसे ‘श्रावणी पर्व’ के नाम से भी जाना जाता है।
इस साल 2021 में राखी का त्योहार 22 अगस्त दिन रविवार के दिन मनाया जाएगा Raksha Bandha / राखी बाँधने का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है—

  • राखी बांधने का मुहूर्त : 06:14:56 से 17:33:39 तक
  • अवधि : 11 घंटे 18 मिनट

Raksha Bandhan का इतिहास / क्यों मनाते हैं राखी

रक्षा-बंधन किस कारण से मनाया जाने लगा इसके पीछे हमारे इतिहास में कई कहानियाँ सुनने को मिलती हैं आप भी जानिए उनके बारे में—

भविष्यपुराण की कथा का महत्व

प्राचीन काल में देवों और असुरों के बीच युद्ध चल रहा था,लगातार 12 वर्षों तक संग्राम हुआ। ऐसा मालूम हो रहा था कि युद्ध में असुरों की विजय होने को है। दानवों के राजा ने तीनों लोकों पर कब्ज़ा कर स्वयं को त्रिलोक का स्वामी घोषित कर लिया था। दैत्यों के सताए देवराज इन्द्र गुरु बृहस्पति की शरण में पहुँचे और रक्षा के लिए प्रार्थना की।
देवराज इंद्र की रक्षा के लिए इंद्राणी शची ने गहन मंत्रों के जप से एक रक्षासूत्र तैयार किया और श्रावण पूर्णिमा के दिन इंद्र की कलाई में बांध दिया। इस रक्षासूत्र ने देवराज इंद्र की रक्षा की और वह युद्ध में विजयी हुए।

महाभारत की कथा

मान्यताओं के अनुसार श्रावण पूर्णिमा के दिन ही द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की तर्जनी पर चोट लगने के बाद अपनी साड़ी से कपड़ा फाड़कर बांधा था। उसके बदले श्री कृष्ण ने उन्हें वचन दिया था कि वे द्रौपदी की हमेशा रक्षा करेंगे। इसीलिए दुःशासन द्वारा चीरहरण की कोशिश के समय भगवान कृष्ण ने साड़ी बढ़ाकर द्रौपदी की रक्षा की थी।

मुगल काल का इतिहास

एक अन्य ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार मदद हासिल करने के लिए चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुग़ल सम्राट हुमाँयू को राखी भेजी थी। और अपने राज्य की रक्षा के लिए याचना की थी। हुमाँयू ने मुसलमान होते हुए भी राखी का सम्मान किया और मेवाड़ पहुँच कर बहादुरशाह से युद्ध कर अपनी बहन और मेवाड़ राज्य की रक्षा की।

सिकंदर और सम्राट पुरु

राखी का त्यौहार के सबसे पुरानी कहानी सन 300 BC की है उस समय सिकंदर यानि Alexander ने भारतवर्ष को जितने के लिए अपनी पूरी सेना के साथ आया था। तब भारत में सम्राट पुरु का काफी बोलबाला था। यहाँ Alexander को सम्राट पुरु से लड़ने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

जब Alexander की बहन ने सम्राट पुरु के लिए एक राखी भेजी थी जिससे की वो Alexander को हरा सके। वहीँ पुरु ने भी, अपनी बहन का कहना माना और Alexander पर हमला नहीं किया था। फिर भी वो जीत गया था।

रक्षाबंधन की आधुनिकता

हम सब जानते हैं रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के अटूट रिश्ते व गहन प्रेम का प्रतीक हैं। हमारी संस्कृति हमे सिखाती हैं कि हमे यह त्योहार बडे प्यार से व पूरे रीति-रिवाज के साथ मनाना चाहिए। मगर वर्तमान युग ने इस त्योहार को भी अपनी चपेट में ले लिया और इस पर भी आधुनिकतावाद का रंग चढा दिया।

जानिए कैसे राखी का त्योहार आधुनिक रंग में रंग गया है :

पहले राखी के धागे कच्चे अवश्य होते थे मगर रिश्तों को मजबूत डोर में बाँधने की ताक़त रखते थे, मगर अब परंपरागत कच्चे सूत के धागों का स्थान महँगी-महँगी राखियों ने ले लिया हैं और अब राखियाँ सोने के व चाँदी के ब्रेसलेट में परिवर्तित हो गयी है, अमीर लोग राखियों के स्थान पर ये ही सोना व चाँदी की राखियाँ बाधते है, अब इसमे भी कोई दो राय नही कि भाई-बहन के बीच का रिश्ता अब दिखावे का रह गया हैं।

Raksha Bandhan के त्योहार पर महँगे महँगे उपहार का लेन देन जरूरी सा हो गया हैं यानि कि अब बहनें पहले की तरह सिर्फ रक्षा का वचन नही लेती राखी बाँधने के बदले वह महँगे तोहफे की उम्मीद भी रखने लगी हैं और जहाँ लेन देन की बात होती हैं वहाँ रिश्ते भला कहाँ टिक पाते हैं।

यह त्यौहार महज़ एक औपचारिकता बन कर रह गया हैं, जहाँ पहले यह त्योहार पूरे रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता था, बहनें पूजा की थाली तैयार किया करती थी, भाई हाथों पर बहुत सारी राखियाँ बँधवा कर सबको दिखाता फिरता था देखा जाए तो अब ऐसा कुछ नही हैं, बहनें अपने भाई के नाम की राखियाँ पार्सल करने लगी हैं और भाई राखी के नाम के पैसे अपनी बहन को भिजवाने लगा हैं, भाई अब अपने हाथ पर बडी-बडी राखी बँधवाने में शर्म महसूस करता हैं।

राखी के त्योहार पर हर भाई सिर्फ अपनी बहन की रक्षा का ही वचन देता हैं मगर देखा जाए तो इन्हीं भाईयों की वजह से दूसरों की बहने तो सुरक्षित है ही नही। कितने शर्म की बात हैं कि समाज में बलात्कार जैसा दुष्कर्म दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।

Raksha Bandhan—एक पहल नयी

रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्योहार के महत्व को बनाए रखने के लिए जरूरत हैं हम सबको एक नयी सोच रखने की,एक नयी पहल करने की।
अकेले हम या आप कुछ नही कर सकते आओ मिलकर एक नयी शुरूआत करें और राखी के पावन त्यौहार को परंपरागत रूप दे उठाए जाने वाले प्रमुख कदम :

माना कि समय के साथ परिवर्तन जरूरी है, सूत के धागे अब प्रचलन में नही हैं लेकिन राखी को सोना-चाँदी का रूप ना देकर हम इस त्यौहार को दिखावे से तो दूर रख सकते हैं ना। आओ शुरूआत करें राखी को राखी ही बनाए रखने की, इसको महँगे मोतियों में ना पिरोने की, इसके धागे में वही मजबूत रिश्ते बाँधने की।

Raksha Bandhan में लेन देन होता हैं मगर भाई की दीर्घायु की प्रार्थना के बदले बहन की उम्र भर की रक्षा करने का। इसीलिए एक बहन को चाहिए कि वह अपने भाई से यही उम्मीद करें कि वह संकट की हर घडी में अपनी बहन की रक्षा करेगा। भाई अपनी इच्छा से और बजट के अनुसार अपनी बहन को उपहार दे सकता हैं मगर महँगे तोहफ़ों का ऐसा दबाव बहन को अपने भाई पर कभी नही डालना चाहिए जिस कारण उनके रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव पडे।

Raksha Bandhan के त्योहार को औपचारिकताओं से अवश्य ही दूर किया जा सकता हैं। इस दिन बहन अपने भाई के घर जाकर पूरे परंपरागत तौर तरीक़ों से राखी बाँधने जाएँ या कभी भाई अपनी बहन के ससुराल अपनी बहन से राखी बँधवाने जाएँ जिस कारण भाई-बहन के रिश्तों में मिठास बनी रहती हैं,लेकिन कभी कोई विवशतावश न जा पाएँ तो अलग बात हैं। भाई को भी अपनी बहनों से राखी बँधवाने में शर्म महसूस नही करनी चाहिए बल्कि गर्व महसूस करना चाहिए क्योंकि कलाई पर राखी भी किस्मत वालों के ही बँधती हैं, जिनके बहने नही है अक्सर उनकी कलाई सूनी रह जाया करती है।

कितना अच्छा हो कि सभी भाई रक्षा-बंधन के त्योहार पर न सिर्फ अपनी बहन की रक्षा का संकल्प ले अपितु समाज की दूसरी लड़कियों अर्थात दूसरों की बहनों की रक्षा के लिए भी वायदा करें। आओ शुरूआत करें इस रक्षा-बंधन से सभी बहनें अपने भाई से ये प्रण ले और सभी भाई अपनी बहनों को वादा करें कि वे न सिर्फ उनकी बल्कि समाज की दूसरी लड़कियों की भी हर संकट से रक्षा करेगें।

Raksha Bandhan की पौराणिक कथाएँ हमे बताती हैं कि प्यार व रिश्ते को निभाने के लिए उनका सगा होना जरूरी नही होता! अत: हमें भी रिश्तों में गरिमा बनाए रखते हुए हर उस इंसान की रक्षा करनी चाहिए जो मुश्किल घडी में हो और हमसे मदद माँगता हो, यह कदम किसी सराहनीय शुरूआत से कम नही होगा।।

दो लाइन राखी के त्यौहार पर

अहसास रिश्तों का कुछ यूँ बना रहे, भाई-बहन के प्यार में ना कुछ कमी रहे,
बहनें सदा कलाई पर सबकी सजी रहें, भाई हर मुश्किल घडी में साथ खडा़ रहे।

तो दोस्तों, उम्मीद हैं आप सबको मेरा ये लेख पसंद आया होगा। आगे शेयर करना न भूलें। धन्यवाद

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