Economy

NPA क्या होता है? Non Performing Assets समझें

Non Performing Assets क्या होते है , इससे बैंक पर क्या प्रभाव पड़ता है

NPA क्या है

NPA की फुल फॉर्म Non Performing Asset होती है जिसको हिंदी में हम गैर निष्पादित परिसंपत्ति बोलते है। जिसका अर्थ है की बैंक ने किसी का कुछ assest(यानि पैसा) perform नहीं कर रहा या वापस नहीं आया।

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जब बैंक किसी को लोन देता है तो कभी कभी ऐसा होता है की लोन लेने वाला बैंक को पैसे वापिस नही कर पाता जब तीन महीनो तक ऐसा होता है तो फिर बैंक उसको नोटिस भेजता है और बैंक लोन वापिस के सब तरीके अपनाता है यदि फिर भी वो वापिस नही कर पाता तो पैसे वापिस आने की सभी उम्मीद खत्म हो जानती है उसको NPA (Non Performing Asset) कहते है।

सरल भाषा में ऐसा पैसा जिसको बैंक वापिस लेने में नाकाम हो जाये उसको NPA बोलते है.

NPA कितने प्रकार का होता है ( Types of Non Performing Asset )

आप लोग को नही पता होते की Non Performing Asset अकेला नही, NPA चार प्रकार का होता है , यह लोन वापिस ना होने की स्थिति पर निर्भर करता है

1. सब स्टैण्डर्ड एसेट्स (Substandard Assets)

यदि किसी आम आदमी या कंपनी ने लोन लिया है और उसने लोन की रकम को एक साल या उस से कम समय में नही चुकाया तो उसका लोन अकाउंट Sub standard Assets कहलाता है।

2. डाउटफुल एसेट्स (Doubtful Assets)

जब कोई लोन अकाउंट एक साल तक सब स्टैण्डर्ड एसेट्स (Substandard Assets) की स्थिति में रहता है तो वो अकाउंट डाउटफुल एसेट्स (Doubtful Assets) कहलाता है.

3. लोस एसेट्स (Loss Assets)

जब किसी आम आदमी या कंपनी से लोन की रकम वापिस आने की कोई भी उम्मीद ना हो तो उसे लोस अस्स्सेट्स कहते है।

4. Gross Non Performing Asset

एक बैंक का कुल पैसा जो किसी एक अवधि के दौरान उधार पर गया है और लोटने की कोई उम्मीद नहीं है GNPA कहलाता है।

Net NPA = Gross NPA – (Balance in Interest Suspense account + DICGC/ECGC claims received and held pending.

RBI की हाल ही में जारी हुई Report के अनुसार सभी cheduled commercial banks (SCBs) का gross non performing assets (GNPA) ratio मार्च 2021 में 12.5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है जो की मार्च 2020 में 8.5 प्रतिशत था।

Reserve Bank of India – Financial Stability Report

अकाउंट NPA कब होता है

जब भी हम बैंक से कोई लोन लेते है तो उसको हम किस्तों में वापिस करते है . यदि हम लगातार तीन बार बैंक को किस्तों में पैसा देने में नाकाम होते है तो हमारा अकाउंट NPA हो जायेगा . उसके बाद बैंक हमें नोटिस भेजता है और यदि फिर भी हम पैसे नही लोटाते है तो बैंक प्रॉपर्टी को नीलाम भी कर सकता है।

देश में NPA कैसे बढ़ रहा है

Non Performing Asset बढ़ने का मुख्य कारण लोन की रकम का वापिस न आना होता है, आम लोगो से तो बैंक लोन की रकम निकलवा लेता है परंतु बड़े लोगो से लोन का पैसे वापस लेन में बहुत दिक्कत होती है, या तो वो भाग जाते है या अपने आप को दिवालिया घोषित कर देते है, देश में ऐसे बहुत से लोग है जिस की वजहों से Non Performing Asset बढता जा रहे है यह बैंकिंग सिस्टम के लिया ठीक नही है।

इस दशक मे भी इसके की मामले देखने को मिले जैसे नीरव मोदी, विजय माल्या इत्यादि।

एनपीए के संभावित कारण क्या हो सकते हैं?

भारत की बैंकिंग प्रणाली में एनपीए के बहुत से संभावित कारण है जिसमे से कुछ महत्वपूर्ण कारण है :

  • किसी असंबंधित व्यापार/धोखाधड़ी के लिए धन का विविधीकरण करना
  • लोन लेने के बाद अगर प्लान ठीक से काम न करे या उसको बीच में ही बदल देना, यानि कह सकते है की अच्छी प्लानिंग न होना।
  • बैंक की तरफ से तुरंत कार्यवाही न होना भी इसका एक कारण है, जिससे की ऋणी को लगता है की ज्यादा जरूरी नहीं है। जैसे की विजय माल्या के केस में हुआ।
  • राजनीतिक कारणों से किसान के ऋण माफ कर देना, न की उनकी आय की बढ़ोतरी के लिए कोई अच्छी प्लानिंग करना।

अगर किसी बैंक का NPA बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो क्या होगा?

भारतीय बैंकिंग प्रणाली में एनपीए की समस्या सबसे महत्वपूर्ण और यह संपूर्ण बैंकिंग प्रणाली पर प्रभाव पड़ा है, उच्च एनपीए अनुपात निवेशकों के साथ साथ जमाकर्ताओं, उधारदाताओं का भी विश्वास हिला देता है

बैंक का profit घटना और खराब छवि

NPA (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों) में वृद्धि जो घरेलू बाजारों और वैश्विक स्तर के बाजारों को छाया देती है, उस स्थिति में बैंक की लाभप्रदता कम हो जाती है जिससे बैंकों की छवि खराब होती है।

बैंक बंद होने का ख़तरा

जब बैंक का NPA जायदा हो जाता है तो बैंक पर जनता और shareholders का विश्वास कम हो जाता है , जिस से बैंक में लेन देन की कमी और बैंकिंग काम कम हो जाते है कभी कभी बैंक अपने NPA को छुपा लेते है जेसा की YES बैंक ने किया था इसलिय बैंक पर बंद होने का खतरा मडराने लगता है

बैंक के पास पैसे की कमी

NPA जायदा हो जाने पर धन के पुनर्चक्रण पर प्रभाव पड़ता है, जिससे बैंक की उधार देने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे बैंक को कम ब्याज आय होती है। यह पैसे के स्टॉक को कम करता है. जिससे आर्थिक मंदी हो सकती है।

आपको किसी भी बैंक मे निवेश करते समय NPA का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ज्यादा जानकारी के लिए ये आर्टिकल पढ़ सकते हैं

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