India

नक्सलवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बडा खतरा है

कैसे नक्सलवाद ने देश को हिला कर रखा है, अभी भी नहीं रुकते नक्सलवादी हमले

Naxalvaad नक्सलवाद
Naxalvaad

नक्सलवाद का इतिहास

नक्सलवाद को सुदूर वाम कम्युनिस्ट (Far-left communists) माना जाता है। West Bengal मे Darjeeling के पास एक गाँव एक नक्सलवाड़ी गाँव है जिसके नाम पर इसका नाम इसका नाम नक्सलवाद पड़ा। 1967 मे एक गरीब किसान का लड़का अपनी जमीन पर खेती कर रहा था जिसको कुछ जमींदारों के लड़कों ने बहुत मारा -पीटा । जिसकी गाँव के सभी लोगों ने आलोचना की । उस दौरान चीन मे Cultural Revolution चल रहा था जिसका नेतृत्व Mao Zedong कर रहे थे । उसकी classless society विचारधारा से ही प्रभावित होकर Charu Mazumdar ने आंदोलन कर दिया, सरकार और प्रसासन को भी चुनौती दे दी। Charu Mazumdar ने कहा जमींदारों की जमीन छीन लो और जो तुम्हारे रास्ते मे आए उसको भी मार दो। Classless society बनाना ही इस आंदोलन की विचारधारा थी। इस विचारधारा से आकर्षित हो कर बहुत सारे लोगों ने इसका समर्थन किया और उसके साथ आ गए। यह धीरे धीरे देश के कई हिस्सों मे फैल गया।

West Bengal में CPI-M ने गठबंदन की सरकार बना ली। जो बीच मे ही गिर गई। West Bengal मे राष्ट्रपति शासन President Rule लग गया तब देश की प्रधानमंत्री Indira Gandhi थी। उसने इस विद्रोह को कुचल दिया जो भी नक्सली मिलता या तो उसको मार दिया जाता या Jail मे डाल दिया जाता। Charu Mazumdar को हिरासत मे ले लिया गया उसको इतनी यातनाए दी की उसकी मौत हो गई। धीरे-धीरे 2001 तक नक्सलवाद शांत हो रहा।

2002 से 2006 के बीच नक्सलवादी हमलों मे 3000 लोगों की जान गए। 350000 लोग बेघर हो गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2002 से 2010 के बीच 20000 लोगों की जान गई जिसमे 5000 से 8000 CRPF के जवान, बहुत से मासूम लोग भी मारे गए। एक के बाद एक नक्सली हमले हो रहे थे। 2010 मे Chhattisgarh के Dantewada जिले मे बहुत बड़ा हमला हुआ जिसमे CRPF के 76 जवान मारे गए। आज भी Dantewada को सबसे ज़्यादा नक्सली प्रभावित क्षेत्र कहा जाता है। नक्सलियों ने इस दौरान एक एक बाद एक नक्सली हमला किया कभी नेताओ की रैली पर हमला कभी CRPF के जवानों पर हमला।
इन सभी को देख कर तब के प्रधानमंत्री मानमोहन सिंह ने कहा “देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नक्सलवाद सबसे बड़ा खतरा है ‘ ।
सरकार ने एक नक्सलवाद को खतम करने के लिए बहुत से कदम उठाए। कई बड़े नक्सली नेताओ को मार गिराया । अभी नक्सलवाद पहले के मुकाबले काम हो गया बीच बीच मे एक दो हमला होता है सरकार ने नक्सलवाद पर लगाम तो लगाई है पर खत्म नहीं हुआ है।

नक्सली प्रभावित क्षेत्र :

नक्सलवादकी शुरुवात तो west bengal से हुई थी, लेकिन धीरे धीरे यह गरीबी और असाक्षरता की वजह से देश के लगबग हर राज्य मे पहुँच चुका है। जहां नक्सलवाद फ़ैला है उन क्षेत्रों को रेड ज़ोन कहते है।

सबसे ज़्यादा नक्सली प्रभावित क्षेत्र – Chhattisgarh, Jharkhand, Odisha, and Bihar

कम प्रभावित क्षेत्र -West Bengal, Maharashtra, and Andhra Pradesh

जहा पर नक्सली प्रभाव छोड़ने की कोसिस की जा रही है – Kerala, Karnataka, Tamil Nadu, Assam, and Arunachal Pradesh

कारण:

नक्सलवाद देश के आदिवासी क्षेत्र मे ज़्यादा है क्यूंकी यह लोग जंगलों मे रहते है इनकी आजीविका जंगल मे खेती करने से चलती है सरकार ने कुछ ऐसे कानून बनाए जिनसे इन लोगों का जंगलों पर स्वामितव कम हो गया है। कुछ pharmaceutical and mining करने वाली कंपनियों ने इनके जमीनो को हड़प लिया और बदले मे इनको कोई फायदा नहीं दिया। सरकार और आदिवासियों के बीच सामंजस्य भी बहुत कम है। असाक्षारता और गरीबी भी नक्सलवाद का बहुत बड़ा कारण है। उनके पास जीने के पर्याप्त संसादन जैसे स्कूल school, health facility, electricity, clean drinking water जैसे सुविधाये नहीं है। इन सभी कारणों से यह लोग अपने आप को ठगा -सा महसूस करते है। इसी वजह से बहुत से आदिवासी नक्सली बन जाते है। राज्य की पॉलिसी भी इनके लिए फायदेमंद नहीं है जिससे इनको फायदा पहुंचा सके। इन सब चीजों को देखने के बाद यह नक्सलवाद की तरफ आकर्षित होते है।

सरकारी प्रयास और समाधान:

इनको संवैधानिक सुरक्षा देनी चाहिए इसके लिए आदिवासियों के लिए वन अधिकार काननों कारीगर हो सकता है भूमि अधिगरण और पुनर्वास कानून नक्सलवाद की लड़ाई मे सहायक साबित हो सकता है sc and st हत्याचार निरोधक कानून इनके अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

नक्सलवादियों के साथ बातचीत की रणनीति, समझोतहे की रणनीति और आत्मसमर्पण की नियति भी कारगर हो सकती है। सरकारी पॉलिसियों तक उनको पहुचाय जाए। नक्सली क्षेत्रों मे सरकारी कार्यालो की व्यवस्था की जाए। विकसात्मक और सुरक्षातमक प्रयाशों बहुत जरूरी है। छतीसगढ़ और central govt. ने नक्सलवाद को रोकने के लिए अच्छे प्रयास भी किए है। इनके मानसिकता को बदलने के साथ साथ सुरक्षा कर्मियों के पुख्ते इंतजाम किए जाने चाइए ।

भारत सरकार ने विकसात्मक और सुरक्षातमक प्रयाशों को धायन मे रखते हुए SAMADHAN रणनीति अपनाई जो बहुत कारगर साबित हो रही है। सरकार के कुछ अच्छे कदमों की वजह से ही नक्सलवाद का दायरा काम हो रह है।

Urban Naxalvaad :

Urban Naxal का मतलब है जो लोग पढे लिखे कामयाब है और शहरों मे रह रहे है। हाल ही खबरों मे Urban Naxal चर्चा का विषय रहा जब Bhima Koregaon कांड मे अल खत के द्वारा प्रधानमंत्री पर हमले की साजिश रची जा रही थी की बात सामने आई । कुछ लोग इनको सरकार की सजिस बता रहे है, कह रहे है जहा से सरकार के खिलाफ आवाज उठ रही है सरकार उसको दबाने के लिए यह सब कर रही है। इस खबर के आधार पर ही कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। अगर सरकार किसी आधार पर यह कह रही है और इन लोगों को गिरफ्तार किया है यह सबको कोर्ट मे साबित करना होगा। वरना ऐसे करना गलत है।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button