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कोरोना महामारी: भारत स्वदेशी कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए अग्रसर

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कोरोना महामारी से केसो की बढ़ती संख्या को देखते हुये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैक्सीन विकास केंन्द्रों का निरीक्षण के लिए अहमदाबाद में जाइडस बायोटैक पार्क, पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और और हैदराबाद में भारत बायोटेक का दौरा करने का फैसला लिया है। इस दौरे के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वैक्सीन की प्रगति और इसको बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए विचार-विमर्श करेंगे।

क्या दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माणकर्ता भारत स्वदेशी वैक्सीन बना पायेगा

कोरोनो महामारी से निजात के लिए सभी देश कोरोना की वैक्सीन बनाने के लगे हुये है। स्वदेशी वैक्सीन बनाने के लिए भारत में भी पुर्जोर कोशिश की जा रही है। भारत बायोटेक के अध्यक्ष डाॅक्टर कृष्णा ईला द्वारा स्वदेशी कोरोना वैक्सीन बनाने की उम्मीद की जा रही है। दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माणकर्ता भारत क्या इस बार कोरोना वैक्सीन बना पायेगा।

कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए किये जा रहे है परीक्षण

कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए सबसे जरूरी है, उनका परीक्षण। वैक्सीन के परीक्षण का मतलब है कि वह वैक्सीन कितनी कारगार है। वैक्सीन के बार-बार परीक्षण से पता किया जाता है कि वैक्सीन लेने से रोगी की बिमारी में कितनी कमी आई है। विशेषज्ञों का दावा है कि अलग-अलग व्यक्ति के शरीर की आनुवंशिक और जातीय पृष्ठभूमि अलग-अलग होती है। इसलिए फार्मा कंपनीयों द्वारा अलग-अलग देशों में इसका परीक्षण किया जाता है।

डाॅक्टर रेड्डी की लैब रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-वी के लिए परीक्षण कर रही है और यूके स्थित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी टीम ने पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया के साथ भारत में परीक्षण करने के लिए करार किया है। भारत बायोटेक अध्यक्ष कृष्णा ईला द्वारा कहा गया है कि भारत में क्लीनिकल ट्रायल बड़ा मुश्किल काम है। परन्तु उनकी टीम लगी हुई है और वो सफल जरूर होगे। भारत बायोटेक इंटरनैशनल कोवैक्सीन नाम से स्वीदेशी कोरोना वैक्सीन विकसित रहा है। इस वैक्सीन के परीक्षण के तीसरे चरण में उन्हें उत्साहजनक परिणाम मिले है।

नाक में डालने वाली वैक्सीन बनाने पर जोर

स्वदेशी वैक्सीन विकसित करने में भारत के सामने चुनौती है कि उसे कोल्ड स्टोरेज और सीमित परिवहन कैसे किया जाये। इस पर डाॅक्टर कृष्णा ईला द्वारा बताया गया है कि इसके लिए वह नाक में डालने वाली वैक्सीन बनाने की रणनीति पर काम कर रहे है। जिसकी केवल एक ही डोज कोरोना की बिमारी से ग्रस्त व्यक्ति को आसानी से दी जा सके। इसके अतिरिक्त वैक्सीन आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केन्द्रो आदि पर दी जा सके और आसानी से लोगों तक पहुँचाई जा सके। चीन में हाॅंग-काॅंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा भी नाक में डालने वाली वैक्सीन बनाने के लिए प्रयोग किये जा रहे है ताकि स्वास्थ्य कर्मीयों को डोज देने के परीक्षण पर किसी प्रकार का कोई जोर ना आये।

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