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Hyperloop क्या है और कैसे यह आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है?

Hyperloop कैसे काम करता है ,कैसे यातायात बदल जाएगा इसके आने के बाद

Hyperloop
Hyperloop

Hyperloop क्या है और कैसे काम करता है ?

Hyperloop का concept सबसे पहले एलोन मस्क (Elon musk) ने दिया था। इस तकनीक को हाइपरलूप इसलिये कहा गया क्योंकि इसमें परिवहन एक लूप के माध्यम से होगा जिसकी गति अत्यधिक होगी। हाइपरलूप चुम्बकीय शक्ति पर आधारित एक तकनीक है।

इस तकनीक मे एक लंबी ट्यूब बिछाई जाती है जिसमे एक Pod या Capsule का प्रयोग किया जाता है। Tube और Pod को मिलकर ही हयपेरलूप टेक्नॉलजी बनता है। Tube और Pod दोनों magnet के बने होते है। Tube की पटरी और Pod का निचला हिस्सा दोनों North pole होते है। जिससे दोनों मे repulsion होगा।

इसमे linear electric motor का उपयोग होता है , ट्रेक -stator और Pod- Rotor की तरह की तरह काम करता है। Tube के अंदर के हवा को बाहर निकालकर उसे वैक्यूम बनाया जाता है (पूर्ण रूप से वैक्यूम नहीं बनाया जाता है)। यह काम बहुत सारे vacuum pump से किया जाता है।

क्यूंकि Pod और Tube के बीच कोई संपर्क नहीं रहता है इसलिए Friction बल नहीं लगता है और Tube के अंदर से 90% हवा को बाहर निकाल लिया जाता है इसलिए Pod को friction और Drag बल का सामना नहीं करना पड़ता है जिससे Pod काफी तेज़ गति से दौड़ता है

इसकी गति लगभग 1200km/hr होगी। इसमे मौसम का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और यह स्वचालन तकनीक से युक्त किया गया है। हाइपरलूप परिवहन का एक नया तरीका है जो कार्गो के साथ लोगों को भी तेज गति से सुरक्षित और ऑन-डिमांड उनके मूल स्थान से गंतव्य तक पहुँचाने में सक्षम है।

Pod

Pod ट्रैन के एक डिब्बे जितना बड़ा होता है जिसमे 30-40 लोग बैठ सकते है। जिस तरह हवाई जहाज मे बैठने की सीट होती है वैसे ही इसमे भी बैठने की सीट होंगी।

Pod के आगे और पीछे Fan होते है जो ब्रेक लगाने मे मदद करते है। जब Pod चलता है तो ये Fan सीधे घूमेंगे और जब Pod को रोकने या Break लगाने होंगे तो ये Fan उलटे घूमेंगे। क्यूंकि Pod और Tube के पटरी के बीच में सीधा संपर्क नहीं है इसलिए Pod को रोकने के लिए फैन का इस्तेमाल  किया जाता है।

Hyperloop Pod
Hyperloop Pod

Solar Panel

यह Tube के ऊपर लगा होता है जो की Pod और Tube को Energy प्रदान करता है। Pod को चलाने के लिए ज़्यादा energy की जरूरत की नहीं है तो उसके लिए solar panel काफी है। दिन के समय Pod को Solar Panel से ऊर्जा दिया जाता है और रात के समय Pod को Battery से ऊर्जा दिया जाता है

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Hyperloop का इतिहास

2012 मे हाइपरलूप का कान्सेप्ट सबसे पहले ‘एलन मस्क’ ने दिया था। ‘एलन मस्क’ ने इसे ‘परिवहन का पाँचवां मोड़’ भी बताया।इस प्रोजेक्ट पर Tesla और SpaceX के इंजीनियर साथ मे काम किया। उन्होंने एक डिजाइन तयार किया जिसमे  पॉडस linear electric motor का इस्तेमाल करके ट्रेक से ऊपर उठ कर बिना घर्षण के के ट्यूब मे चलेगा। ट्यूब मे कोई वायु दबाव नहीं होगा। “एलन मस्क ” ने हयपेरलूप को open source design कर दिया। 2015 मे बहुत सी कंपनियां और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट आगे आए इस प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए। और इसमे उन्नति भी की।

एक वर्जिन हाइपरलूप वन (Virgin Hyperloop One)कंपनी ने भी इस पर बहुत मेहनत और पैसा लगाया। वर्जिन हाइपरलूप वन (Virgin Hyperloop One) ने Las Vegas, Nevada मे पहला सफल मानव प्रसिकक्षण (human trial) किया।

दुनिया के किन देशों में यह तकनीक प्रस्तावित है?

अमेरिका, कनाडा ,यूरोप, और सऊदी अरब देशों मे इस तकनीक को लाने के लिए काम हो रहा है। विकसित देशों मे हाइपरलूप प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है।

वर्जिन हाइपरलूप वन द्वारा अमेरिका के नेवादा राजमार्ग के साथ दुनिया का पहला और एकमात्र पूर्ण पैमाने वाला हाइपरलूप परीक्षण ट्रैक ‘डेवलूप’ (DevLoop) का विकास किया गया है।इस रूट पर पहला मानव परीक्षण सफल रहा। जो बहुत बड़ी कामयाबी है।

भारत में hyperloop

महाराष्ट्र सरकार ने 2018 वर्जिन हाइपरलूप वन (Virgin Hyperloop One) को मुंबई से पुणे के बीच हाइपरलूप लिंक की अनुमति दी थी और Rs.70,000 निवेश का निवेश होना था। लेकिन uddhav thakrey की सरकार आने के बाद उन्होंने इस प्रोजेक्ट को यह कह कर बंद कर दिया की इस पर बहुत खर्चा होगा। अगर दूसरों देशों मे यह सफल होता है तो हमारी सरकार इस पर विचार करेगी। लेकिन अभी भी भारत सरकार से इस पर प्रोजेक्ट पर चर्चा चल रही है।

चुनौतियाँ

  1. इसका सबसे बाद खतरा भूकंप है, एक हल्के से भूकंप के झटके से दुर्घटना हो सकती है। इसके आलोचक इसी वजह को इसकी सबसे बड़ी कमी बता रहे है।
  2. 1000 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से चलने पर इसमे ईमर्जन्सी ब्रेक लगाने समस्या होगी। लेकिन इसमे आगे और पीछे दो फैन लगाए है जो हवा को पास करेंगे और ब्रेक लगाने मे मदद करते है।
  3. साथ मे इसकी स्पीड तेज होने के कारण इसके लिए घुमावदार रास्ता नहीं हो सकता इसके लिए एक दम सीधा रास्ता चाहिए जिसके लिए रास्ते मे आने वाले पैड पौदों को काटना पड़ेगा। इसको शरुवाती चरण मे ज़्यादा निवेश चैये होगा।
  4. कम वायु दबाव वाली यात्रा कम सफर करने वाले यात्रियों के कान मे प्रॉब्लेम पैदा करती है। जो की प्लेन मे भी होती है। एक बार मे एक पॉड ही चलेगा। लेकिन धीरे-धीरे इस प्रॉब्लेम को भी दूर कर लिया जाएगा।

फायदे

  1. इसमे घर्षण काम होगा तो बिजली का काम उपयोग होगा। इसलिए इसमे सोलर पैनल लगाए जाएंगे जिससे वातावरण पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  2. मौसम का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। काम घर्षण की वजह से maintainace बहुत कम होगा।
  3. इसकी स्पीड नॉर्मल फ्लाइट से जायदा होगी।

कब तक मानव परीक्षण पूरे होंगे

कंपनी का अनुमान है कि 2025 तक परीक्षण पूरे हो जाएंगे और फिर इन्हें आम नागरिकों के उपयोग के लिए शुरू किया जा सकेगा ।

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