Personality

गुरु रविदास (Guru Ravidas) जी का जीवन परिचय और जयंती विशेष

संत Guru Ravidas जी महान संत, कवि और समाज सुधारक थे। उनकी जयंती पर हम उनका जीवन कैसा बिता, उनका जन्म, शिक्षा दीक्षा, समाज सुधारक कार्य के बारे में पढ़ेगे।

guru-Ravidas-jayanti
Guru Ravidas ji

गुरु रविदास जी का जन्म, शिक्षा दीक्षा और समाज सुधारक कार्य – हिंदी में

हम संत रविदास जी की जयंती पर उनके जीवन, शिक्षा, विवाह. सामाजिक काम, उनके जीवन से संबंधित कहानी, और सरकार द्वारा बनाये हुआ स्मारकों के बारे में पढ़ेगे.

जीवन परिचय

संत रविदास जी का जन्म 1398 ईस्वी में ग्राम सीर गोवर्धनपुर जिला वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुआ। इनकी माता का नाम श्रीमती कलसा देवी और पिता का नाम श्री संतोख दास था। इनके दादा का नाम’ श्री कालू राम और दादी जी का नाम श्रीमती लखपति जी था।

इनके पिता राजा नगर के सरपंच थे और वो जूतों को बनाने और ठीक करने का काम करते थे, वो मरे हुआ जानवरों की खाल से चमड़ा बना कर चप्पले और जूते बनाते थे।

इनको अन्य नामो रैदास, रोहिदास और रूहिदास से भी पुकारा जाता है इनका जन्म चमार जाति में हुआ था।

Guru Ravidas ji बचपन से ही बहुत बहादुर, निडर और भगवान को मानते थे परन्तु इनका जन्म नीची जाति (हिन्दू धर्म के अनुसार) में होने की वजह से इनको उच्च जाति के लोगो की बहुत सी हीन भावनाओ और अन्य समस्यों से जूझना पड़ा। इसके लिए इन्होने कलम का सहारा लिया और अपने रचना लेखन के द्वारा समाज सुधारक का काम किया। समाज को सिखाया की कैसे सभी मिलजुल कर प्यार से रहते है।

इनकी शिक्षा के बारे में

संत रविदास जी बचपन में पंडित गुरु शारदा नन्द की पाठशाला में पढने के लिए गए। वहीं कुछ उच्च कुल के छात्रों द्वारा विरोध करने के कारण उनका पाठशाला में जाना बंद हो गया। ये बात जब पंडित जी को पता चली तो उन्होंने छात्रों को समझया की ये कोई आम बालक नही है , ये तो भगवान द्वारा भेजा गया धार्मिक बालक है । पंडित जी रविदास जी से बहुत प्रभावित थे , वो जानते थे की वो एक दिन बहुत बड़ा समाज सुधारक बनेगा।

वही पाठशाला में पंडित जी का बेटा भी पढाई करता था। रविदास जी की उस से बहुत अच्छी दोस्ती हो गई। एक दिन जब वो दोनों लुकाछिपी खेल रहे थे, तो खेलते खेलते रात हो गई तो उन दोनों ने अगली सुबह खेलने का फैसला लिया.

जब अगले दिन Guru Ravidas जी खेलने के लिए आए तो उनका दोस्त काफी देर तक नही आया, तो रविदास जी अपने दोस्त के घर चले गए , वहा जा कर देखा तो सभी लोग रो रहे थे , लोगो ने बताया की आप के दोस्त की तो रात को ही मृत्यु  हो गई थी, यह सुन कर संत जी सन्न रह गए। संत जी अपने मित्र के पास गए और बोले “उठो दोस्त ये सोने का समय नहीं खेलने का समय है” , यह सुन कर उनका मृत दोस्त खड़ा हो गया। यह चमत्कार देख कर सभी लोग अचंभित रह गये। क्योकि बचपन से ही इनके रविदास जी के पास दैवीय शक्ति थी।

वैवाहिक ज़िंदगी

ईश्वर के प्रति उसके प्यार, प्रेम और समर्पण की वजह से उनका ध्यान अपने पुश्तेनी काम में नही लग रहा था, ये अपने खानदानी काम के बिलकुल विपरीत थे तो इनके घर वालो को चिंता होने लगी, इसी वजह से इनके माता पिता ने बचपन में जल्दी ही इनका विवाह कर दिया.

इनकी पत्नी का नाम श्रीमती लोना देवी था। थोड़े समय बाद इनको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इनके पुत्र का नाम विजय दास था.

विवाह होने का बाद भी उनका मन अपने खानदानी काम में नही लगा और वो सांसारिक जीवन में जयदा रूचि रखते थे । फिर उनके माता पिता से वो अलग रहने लगे और अपने ही घर के पिछले हिस्से में रहने लगे। तथा अपने सभी सामाजिक कामो में ध्यान देने लगे।

इसके बाद Guru Ravidas जी ईश्वर के बड़े अनुयायी बन गए और ये हमेशा राम, रघुनाथ, राजाराम चन्द्र, कृष्णा, हरी, गोविन्द आदि शब्द उपयोग करते थे।

गुरु रविदास जी की सामाजिक मुद्दों में भागीदारी

रविदास जी ने लोगो को सिखाया की कोई भी अपनी जाति, धर्म से नही जाना जाता, सभी अपने काम और कर्मो से जाने जाते है। उस समय लोगो में बहुत धार्मिक और सामाजिक भेदभाव बढ़ चुका था।

Guru Ravidas जी ने उच्च नीच के भाव को मिटने और उच्च जाति के लोगो द्वारा किये जाने वाले दुर्वव्हार और स्कूल में जाने से वर्जित, ग्राम में बाहर गुमने से वर्जित, मंदिर के लिए, और तो और ग्राम में घर में न रह कर झोपडी में रहने के लिया नीच जाति के लोगो को मजबूर किया गया।

ये सब देख कर छुआछूत को ख़त्म करने और निम्न जाति के लोगों की बुरी स्थितियों से निपटाने के लिए सभी को संदेश देना शुरू कर दिया।

रविदास जी सन्देश देते थे की “ ईश्वर ने इन्सान को बनाया है न की इन्सान ने ईश्वर को” इसका अर्थ है ईश्वर द्वारा मनुष्य को बनाया गया है सबको इस धरती पर सामान अधिकार है। संत Guru Ravidas जी ने लोगों को वैश्विक भाईचारा बनाने और सहिष्णुता होने का ज्ञान सबको दिया।

संत Guru Ravidas जी की पद, धार्मिक विचार, रचनाओं, भक्ति गीत को सिखो के पवित्र ग्रन्थ में 5वे गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी द्वारा संकलित किये गए है।

गुरु रविदास जी की शिक्षा के अनुयायियों को सभी लोग आमतौर पर “रविदासिया” कहते है और शिक्षाओं और उपदेशो के संग्रह को “रविदासिया पंथ” कहा जाता है।

संत रविदास जी की कहानी

एक रानी थी, वो एक दिन गंगा में नहाने गई तो उसका एक कंगन गुम हो गया । काफी समय तक खोजने पर भी नही मिला । तो रानी बहुत उदास हो गई। सभी ने कंगन खोजने का भरपूर प्रयास किये।

तो किसी ने बताया की रविदास जी आप का कंगन खोज सकते है, तो रानी उनके पास चली गई। तब Guru Ravidas जी ने कहा आप का मन पवित्र होना चहिये। रैदास जी ने माँ गंगा को याद कर अपनी कठौती से जल छिड़का, तभी कठौती में कंगन प्रकट हो गया। ये देख कर रानी बहुत खुश हुई तभी से “मन चंगा तो कठौती में गंगा” कहावत प्रचलित है।

मीरा बाई से इनका जुड़ाव

रविदास जी को मीराबाई का अध्यात्मिक गुरु माना जाता है, मीराबाई राजस्थान के राजा की बेटी और चित्तौड़ की रानी थी। मीराबाई अपने दादा जी का साथ अकसर वहा आया करती थी , बाद में रविदास जी को मीराबाई ने अपना गुरु बना लिया थी , अपने गुरु के बारे में लिखती है जैसे-

“गुरु मिलीया रविदास जी दीनी ज्ञान की गुटकी,

चोट लगी निजनाम हरी की महारे हिवरे खटकी”।

मिलिये रविदास जी “।

संत रविदास की मृत्यु

गुरु जी की सचाई, मानवता, प्रेम, प्रभु की भक्ति, समाज में एकता आदि की कारण, उनके अनुयायी बढ़ते जा रहे थे । इसी वजह से कुछ लोगो ने उन्हें मारने की योजना बनाई। कुछ लोगो ने गाँव से दूर एकांत में किसी विषय पर चर्चा के लिए गुरु जी को आमन्त्रित किया, परन्तु रविदास जी को शक्तियो की वजह से पहले ही उनकी योजना का पता चल गया था।

जैसे ही चर्चा आरम्भ होती है तो गलती से उनका ही साथी बल्ला राम मारा जाता है । कुछ देर बाद जब Guru Ravidas जी अपनी झोपडी में शंख बजाते है तो सभी अचंबित हो जाते है । और देखते है की उनका ही साथी मारा गया। फिर सभी गुरु जी से माफ़ी मांगते है।

कहा जाता है की संत रविदास जी की मृत्यु  120 या 126 साल बाद स्वाभाविक रूप से हुई । परन्तु कुछ लोगों का मानना ​​है कि उनकी मृत्यु 1540 में वाराणसी (उनके जन्म स्थान) में हुई थी।

गुरु रविदास जयंती 2021 में कब है? 

रविदास जयंती को हर साल माघ महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन वार्षिक उत्सव होता है। वाराणसी में इनके जन्म स्थान ‘श्री गुरु रविदास जन्म स्थान’ में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। जहाँ लाखों की संख्या में रविदास जी के भक्त वहां पहुँचते है।

इस साल संत रविदास जी की जयंती 27 फरवरी 2021, को मनाई जाएगी, जो उनका 643वा जन्म दिवस होगा। सिख समुदाय द्वारा नगर कीर्तन का आयोजन किया जाता है। कुछ अनुयायी इस दिन पवित्र नदी में स्नान करते है, उनकी प्रतिमा को फूल चढ़ा कर पूजा करते है।

Guru Ravidas जयंती मनाने का उद्देश्य यही है की हम उनके द्वारा दिए गए भाईचारे का सन्देश, प्रेम, शांति, ईश्वर भक्ति की सीख को दुनिया में फैला सके।

Guru Ravidas जी के लिये स्मारक

इनके नाम पर सरकार द्वारा बहुत से पार्क, घाट, मंदिर और नगर बनाये गए है । जैसे –

  • वाराणसी में श्री गुरु रविदास पार्क
  • गुरु रविदास घाट
  • संत रविदास नगर
  • श्री गुरु रविदास जन्म अस्थाना मंदिर, वाराणसी
  • श्री गुरु रविदास मेमोरियल गेट

संत गुरु रविदास जी के नाम के पर अन्य स्मारक पूरे भारत के साथ-साथ विदेशों में भी स्थित हैं।

Leave a Reply

Back to top button