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क्या है GNCTD (Amendment) Bill 2021, कैसे इस बिल ने दिल्ली सरकार की शक्तियाँ कम की

हाल ही मे केंद्र सरकार ने संसद मे Government of National Capital Territory of Delhi Bill, (Amendment) Act 2021 GNCTD (Amendment) Bill 2021 पास किया है। जिससे फिर एक बार दिल्ली की केजरीवाल सरकार और केंद्र सरकार आमने सामने हो गई है। दिल्ली सरकार का आरोप है की यह बिल दिल्ली सरकार की शक्तियों को काम करने के लिए लाया गया है । ये बिल पास होने के बाद दिल्ली सरकार की शक्तियों पर सवाल खड़ा हो गया गया है। ये बिल पास होने के बाद दिल्ली सरकार का सीधा मतलब उपराज्यपाल यानी एलजी होगा।

क्यों दिल्ली सरकार GNCTD (Amendment) Bill 2021 विरोध कर रही है

यह बात सबको पता है की दिल्ली मे केंद्र सरकार और केजरीवाल सरकार की जंग बहुत पुरानी है। जबसे दिल्ली मे केजरीवाल सरकार बनी है। तब से एलजी (LG) और केजरीवाल के बीच शक्तियों का विरोध होता रहा है। शुरू से ही इनकी जंग की खबर चर्चा मे रही है । यह लड़ाई इतनी बड़ी हो गई थी की ये बात सुप्रीम कोर्ट मे पहुँच गई थी। 2018 मे सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया जिसमे एलजी और दिल्ली सरकार की भूमिकाओं और अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट किया।

GNCTD (Amendment) Bill 2021
GNCTD (Amendment) Bill 2021

दिल्ली सरकार का आरोप है की दिल्ली मे बीजेपी की करारी हार या 1998 से दिल्ली मे बीजेपी की सरकार नहीं बनी है इसी मलाल मे आ कर केंद्र सरकार ने यह GNCTD (Amendment) Bill 2021 पास किया है। आप लोगों को यह जानकार हैरानी होगी की 1998 मे सुषमा स्वराज की हार का सबसे बड़ा कारण प्याज के ऊंचे दाम थे।

कुछ लोग न्यूज चैनल पर कह रहे है की केजरीवाल सरकार ने 3 कृषि काननों के खिलाफ किसान आंदोलन मे किसानों को जो समर्थन दिया है उससे बीजेपी खासी नाराज हुई क्योंकि जब किसानों को दिल्ली के बुराडी मैदान मे ले जाने के लिए बस की मांग की तो केजरीवाल ने मन करके अपनी शक्तियाँ दिखाई। जिससे बीजेपी ने इनकी शक्तियां कम करने की सोची। भाजपा को एक तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराजगी जिसमे एलजी की पावर कम कर दी गई दूसरा बहुत समय से सत्ता से बाहर होनी की वजह ।

वही बीजेपी की और से भी कुछ दलील दी गई है की सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नजर मे रखते हुए वह गवर्नमेंट ऑफ नैशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली ऐक्ट GNCTD Bill में संशोधन लाई है। बीजेपी ने राज्य सभा मे चर्चा के दौरान कहा की दिल्ली विधानसभा से युक्त एक केंद्र शासित प्रदेश है। गृह राज्य मंत्री किशन रेड्डी ने कहा संविधान के 239 ए अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति दिल्ली के लिए उपराज्यपाल की नियुक्ति करते हैं। अगर उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार सरकार के बीच किसी विषय को लेकर मतभेद होता है तो उपराज्यपाल इसके बारे में राष्ट्रपति को सूचित करते है । जो एक सविधान के अनुसार हो रहा है । हम यह GNCTD (Amendment) Bill 2021 पास सविधान के दायरे मे कर रहे है । ये बीजेपी की दलील है।

अब GNCTD (Amendment) Bill 2021 के तहत एलजी का अधिकार क्षेत्र काफी विस्तृत हो गया है। बिल में प्रावधान है कि राज्य कैबिनेट या सरकार किसी भी फैसले को लागू करने से पहले लेफ्टिनेंट गवर्नर की ‘राय’ लेगी। इसलिए अब इसी बात की वजह से केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार एक बार फिर आमने सामने आ गई है।

क्या है GNCTD (Amendment) Bill 2021

इस बिल में यह सुनिश्चित किया गया है कि उपराज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 239क के खंड 4 के अधीन सौंपी गई शक्ति का उपयोग करने का अवसर दिया जा सके। विधेयक पारित कराने के लिए मत विभाजन की मांग की गई। जिसमें 45 के मुकाबले 83 मतों से विधेयक पारित हो गया।

GNCTD (Amendment) Bill 2021 मे ये बिल्कुल साफ कर दिया गया है की दिल्ली विधानसभा मे बनाए गए किसी भी कानून मे दिल्ली सरकार का मतलब एलजी होगा। एलजी को सभी निर्णयों, प्रस्तावों और एजेंडा की जानकारी देनी होगी। यदि LG और दिल्ली की केजरीवाल सरकार के बीच किसी मामले पर मतभेद है तो एलजी उस मामले को राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं। इतना ही नहीं, एलजी विधानसभा से पारित किसी ऐसे बिल को मंजूरी नहीं देंगे जो विधायिका के शक्ति-क्षेत्र से बाहर हैं। वह इसे राष्‍ट्रपति के विचार करने के लिए रिजर्व रख सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के अपने फैसले में भी साफ किया था कि जनता द्वारा चुनी हुई दिल्ली सरकार जो भी फैसला लेगी, उसके बारे में वह एलजी को जानकारी देगी। लेकिन एलजी की सहमति जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैलसे मे एलजी के पास सार्वजनिक व्यवस्था, जमीन और पुलिस के मामले ही रह गए थे ।

हालांकि, अब इस GNCTD (Amendment) Bill 2021 के तहत एलजी को यह अधिकार मिल गया है कि अगर वह चुनी हुई सरकार के किसी फैसले से सहमत नहीं हैं तो मामले को राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं।

दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, नैशनल कॉन्फ्रेंस समेत कई विपक्षी पार्टयों ने इस GNCTD (Amendment) Bill 2021 का विरोध किया है। अरविन्द केजरीवाल ने कहा की बीजेपी जनता द्वारा चुनी हुई सरकार की शक्तियां कम करना चाहती है इसलिए वो इस बिल को लाए। अरविन्द केजरीवाल ने कहा जनता ने वैसे तो चुनाव मे बीजेपी बुरी तरह नकार दिया, तो अब वो लोग चोर दरवाजे से दिल्ली मे राज करना चाहती है ।

केजरीवाल सरकार की कमजोरी की वजह

जब 1991 मे 239 ए अनुच्छेद के तहत GNCTD बिल पास किया गया था तब काँग्रेस की सरकार थी। काँग्रेस ने दिल्ली को विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया और उसको सीमित विधायिक शक्तियां दी गई। बीजेपी ने 239 ए अनुच्छेद के मे ही बदलाव करके GNCTD (Amendment) Bill 2021 पास किया। जिसमे बीजेपी ने सरकार का मतलब कहा अब दिल्ली सरकार का मतलब एलजी होगा।

एलजी और केजरीवाल सरकार की जंग का इतिहास

केंद्र के शक्तियों के अधिकार के खिलाफ दिल्ली सरकार ने 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट गई। एक साल बाद हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि दिल्ली में प्रशासन से जुड़े कार्यों पर एलजी का अधिकार है। फिर एक महीने बाद जब तत्कालीन एलजी नजीब जंग ने इस्तीफा दे दिया तब पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल बैजल को 2016 में एलजी नियुक्त किया गया.

साल 2017 में दिल्ली सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गई और संवैधानिक बेंच के समक्ष इस पर सुनवाई की गई. 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि रोजमर्रा के सरकारी कामकाज में दिल्ली सरकार को एलजी की सहमति लेने की जरूरत नहीं है।

अब यह बिल राज्य सभा और लोकसभा दोनों जगह बहुमत से पास हो गया है । क्यूंकी दोनों सदनों मे बीजेपी का बहुमत है तो बिल को पास करने मे किसी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा ।  सदन में विधेयक पेश होने के साथ राज्यसभा में काँग्रेस और आम आदमी पार्टी ने जमकर हंगामा किया और बीजेपी पर आरोप लगाए की यह दिल्ली की जनता के साथ धोखा है ।

आशा करता हूँ कि आपको यह लेख अच्छा लगा होगा यदि आपके मन में इस article को लेकर कोई भी doubt है या आप चाहते है की इसमें कुछ सुधार होनी चाहिए तब इसके लिए आप नीचे comments लिख सकते हैं। आपका दिन मंगलमय हो।

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