India

क्या है कृषि संशोधन एक्ट, किसान क्यूं पंहुचे विरोध मे दिल्ली?

कृषि सुधार का दावा कर रहे तीन बिलों के खिलाफ किसान पहुंचे दिल्ली, जाने क्या क्या संभावित परिणाम हो सकते है इन बिलों के।

तीन दिन पहले किसानों द्वारा शुरू किया गया था ‘दिल्ली चलो’ अभियान। दिल्ली पुलिस की तमाम कोशिशों के बावजूद पंजाब तथा हरियाणा के किसान दिल्ली आ पहुंचे हैं।

Farmer Protest Against GOI Farmer Bills
Farmer Protest Against GOI Farmer Bills

सितंबर में पारित कृषि संशोदान एक्ट के खिलाफ किसान दिल्ली की सड़कों पर विभिन्न किसान संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। यह एक्ट कृषि वस्तुओं के व्यापार, मूल्य आश्वासन, अनुबंध सहित कृषि सेवाओं और आवश्यक वस्तुओं के लिये स्टॉक सीमा में कृषि अर्थव्यवस्था के कुछ प्रमुख पहलुओं में बदलाव लाने से संबंधित हैं। इस एक्ट मे मुख्य कृषि उपज के निजी स्टॉक पर प्रतिबंध को हटाना और बिचौलियों से मुक्त व्यापारिक क्षेत्र बनाना हैं । लेकिन किसानों का मानना है कि यह ऐक्ट न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price- MSP) प्रणाली को कमज़ोर कर सकती  है।

ये तीन एक्ट हैं।

  1. किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक, 2020।
  2. मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता विधेयक, 2020।
  3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020।

1. किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) एक्ट, 2020

इस एक्ट के अनुसार किसान अपनी उपज को देश में कहीं भी बेच सकते है। इसके लिए विशेष रूप से प्राइवेट मंडियाँ भी स्थापित की जाएंगी। अभी किसान अपनी उपज APMC(Agricultural Produce Market Committees) मे अपनी उपज मिडलमेंन या आढ़ती को बेचते है,ये आढ़ती किसानों की उपज को ट्रैडर को बेचते हैं। जिसके लिए उनको 2.5-3% कमीशन मिलता है। ये आढ़ती राज्य सरकार द्वारा लाइसेन्स प्राप्त होते हैं।

लाभ

  • इस एक्ट के माध्यम से किसानों और व्यापारियों को कृषि उपज की खरीद और बिक्री के लिये अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे.
  • इस अधिनियम में कृषि क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग का भी प्रस्ताव किया गया है किसानों से उनकी उपज की बिक्री पर कोई उपकर या लगान नहीं लिया जाएगा।
  • साथ ही इसके तहत किसानों के लिये एक अलग विवाद समाधान तंत्र की स्थापना का प्रावधान भी किया गया है।

चुनौतियाँ

  • इस अधिनियम से इस प्रकार की स्थिति निर्मित हो जाती है, जिसमे किसानों को स्थानीय बाज़ार में अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने से कोई खरीददार नहीं मिलता है।
  • भारत में अधिकतर किसान छोटे और सीमांत कृषि-भूमि के मालिक होते हैं, इसे किसानों के लिए अपनी उपज को दूर के बाज़ारों मे बेचने के लिए अधिक खर्च परिवहन पे करना होगा। क्योंकि छोटे किसान के पास उपज का हिस्सा भी कम होगा तो बड़े व्यापारियों क सामने खुद को कमजोर स्थिति मे पाएगा।
  • किसानों को अपनी उपज स्थानीय बाज़ार में ही न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमतों पर बेचने के लिये मजबूर होना पड़ेगा।

2. मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता विधेयक, 2020

अधिकांश भारतीय किसानों के पास काम कृषि योग्य भूमि होती है। मौसम पर निर्भरता, उत्पादन और बाज़ार की अनिश्चितता के कारण किसान की प्रकार की समस्याओं का सामना करते है। इन कमज़ोरियों के कारण आर्थिक दृष्टि से कृषि में बहुत अधिक जोखिम होता है। इसलिए हर साल हजारों किसान आत्महत्या कर लेते हैं।

लाभ 

  • यह विधेयक किसानों को सीधा प्रसंस्करणकर्त्ताओं, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा कारोबारियों, निर्यातकों आदि से जुड़ने में सहायता करेगा और बिछोलिया तथा मध्यस्थों की भूमिका को समाप्त करेगा।
  • इस विधेयक से कृषि उपज को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँचाने हेतु आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण तथा कृषि अवसंरचना के विकास हेतु निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

चुनौतियाँ 

  • पहली चिंता का कारण अनुबंध कृषि में किसानों तथा कार्पोरेट्स के मध्य समझौता करने की शक्ति से संबंधित है। इसमें एक किसान अपनी पैदावार के लिये उचित मूल्य तय करने में कॉर्पोरेट अथवा बड़े व्यावसायिक प्रायोजकों के साथ समझौता करने में पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं होता है।
  • दूसरे अधिनियम में कहा गया है कि गुणवत्ता मानकों को समझौते में दोनों पक्षों द्वारा पारस्परिक रूप से तय किया जा सकता है। लेकिन, कॉरपोरेट्स के द्वारा उपज की गुणवत्ता के संदर्भ में एकरूपता मामलों को शामिल करने पर, गुणवत्ता पहलू काफी महत्वपूर्ण हो जाएगा, क्योंकि, देश में कृषि-पारिस्थितिक विविधता में असमानता होने कारण गुणवत्ता में एकरूपता संभव नहीं होगी।

3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020

इस एक्ट के अनुसार, अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया गया है। संशोधन इन खाद्य वस्तुओं के उत्पादन, भंडारण, संचलन और वितरण को निष्क्रिय कर देगा। केंद्र सरकार को युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि और प्राकृतिक आपदा के दौरान आपूर्ति के विनियमन की अनुमति है।

कृषि उपज पर किसी भी स्टॉक सीमा का प्रभाव मूल्य वृद्धि पर आधारित होना चाहिए। स्टॉक सीमा केवल तभी लगाई जा सकती है जब बागवानी उत्पादों के खुदरा मूल्य में 100% की वृद्धि हो; और गैर-खाद्य कृषि खाद्य पदार्थों के खुदरा मूल्य में 50% की वृद्धि हो।

लाभ

  • इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने विनियामक वातावरण को उदार बनाने के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने का प्रयास किया हैं।
  • इस संशोधन के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में इन कृषि‍ उपजों की कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है।इस संशोधन से कृषि क्षेत्र की समग्र आपूर्ति श्रृंखला तंत्र को मज़बूती मिलेगी।
  • इस संशोधन के माध्यम से इस कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर किसान की आय दोगुनी करने और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने की सरकार के उद्देश्य में सहायता होगी।

चुनौतियाँ

  • इस अधिनियम के अंतर्गत कृषि उपजों की मूल्य सीमा में उतार-चढ़ाव काफी विषम है (बागवानी उपजों की खुदरा कीमतों में 100% की वृद्धि तथा शीघ्र खराब नहीं होने वाले कृषि खाद्य पदार्थों की खुदरा कीमतों में 50% की वृद्धि)।
  • इसके तहत किसी कृषि उपज के मूल्‍य श्रृंखला (वैल्‍यू चेन) प्रतिभागी की स्‍थापित क्षमता स्‍टॉक सीमा लगाए जाने से मुक्‍त रहेगी। निर्यातक, वस्तुओं की मांग दिखाने पर, स्‍टॉक सीमा लगाए जाने से मुक्‍त रहेंगे।

निष्कर्ष

भारत की 40 प्रतिशत से अधिक आबादी कृषि कार्यों में संलग्न है ऐसे में किसानों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इस समय भारत में 7000 APMC हैं जिनमें एक बोरी उठाने वाले मजदूर से लेकर पढे लिखे अकाउंटेंट काम करते हैं अतः इन लोगों के हितों को भी ध्यान में रखना होगा ऐसे में APMC को समाप्त करने की बजाय इन्हे सही रूप से संचालित करने की आवश्यकता हैं। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए की किसानों ने महामारी के दौरान भी अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है इसलिए किसानों के हितों को सर्वोपरि रखना अत्यावश्यक है जिससे किसानों की स्थिति को सही किया जा सके।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button