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चीन तथा भारत के सैनिकों के बीच सिक्किम स्थित नाकुला पास पर हुई भिड़ंत

चीन अपनी आक्रामकता से बाज नहीं आ रहा है हाल ही मे चीनी सैनिकों को भारत के सैनिकों के साथ सिक्किम स्थित नाकुल पास पर झड़प करते हुए देखा है। इसमे 40 चीनी सैनिकों के घायल होने की जानकारी है तथा भारत के 5 सैनिक घायल हुए है।

चीन व भारतीय सैनिकों की हुई झड़प

चीन व भारतीय सैनिकों की हुई झड़प
चीनी तथा भारतीय सैनिक

चीन की विस्तारवादी नीति के साथ साथ आक्रामकता भी किसी से छिपी नहीं है। हाल ही में चीन ने जिस प्रकार से चीन के सैनिकों ने भारतीय सैनिकों के साथ हुई झड़प से यह साफ दिखाई दे रहा है की चीन किसी बड़ी साजिश की तैयारी में है। कोरोना महामारी के कारण चीन को विश्व स्तर पर काफी शर्मिंदगी से गुजरना पड़ा है। जिस कारण भी चीन की बौखलाहट सामने आ रही है।

अरुणाचल प्रदेश के पास एक गाँव बसाने के बाद यह खबर सामने आई है की 20 जनवरी को 2021 को चीन ने सिक्किम बॉर्डर के पास भारतीय सैनिकों के साथ सिक्किम बॉर्डर पर कब्जा करने के उद्देश्य से नकुला पास के पास भिड़ंत की है। जिसमे चीन के 20 जवान घायल हुए है।

पिछले दिनों एक खबर सामने आई थी कि एक चीनी सैनिक गलती से भारत में घुस गया है जिसे भारत ने प्रोटोकॉल्स के तहत छोड़ दिया था मगर अब अनुमान लगाया जा रहा है कि वो चीनी सैनिक गलती से भटका हुआ नहीं था अपितु जासूसी करने भारत की सीमा में घुसा था। भारत और चीन के रिश्ते बहुत बुरे दौर से गुजर रहे है। भारत तथा चीन के मध्य 9 वार्ताएं हुए है जिससे अभी कोई हल निकाल कर नहीं आया है। सिक्किम पर हुई झड़प इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्यूँ कि सिक्किम को चीन भी भारत का हिस्सा मानता है।

पहले अरुणाचल प्रदेश की सीमा में गाव बसाना तथा उसके बाद सिक्किम बॉर्डर पर भिड़ंत से साफ पता चलता है की चीन बौखलाया हुआ है और भारत को किसी न किसी विवाद में उलझा कर रखना चाहता है। दरअसल भारतीय जवान जिस प्रकार लद्दाख में खड़े रहे तथा इंडिया की वेक्सीन डिप्लोमेसी की सफलता के करण भी चीन बौखला गया है। आज सार्क दशों ने पाकिस्तान को छोड़कर इंडिया की कोविडशील्ड वैक्सीन को स्वीकार किया है। भारत ने नेपाल, श्री लंका,भूटान बांग्लादेश को वैक्सीन भेजी है। चीन के ग्लोबल टाइम्स ने भारत के सीरम इंस्टिट्यूट में आग लगने वाली घटना के बारे में कहा था की उससे यह सवाल खड़ा होता है की क्या भारत बड़ी मात्रा में हाई क्वालिटी वैक्सीन उत्पादित कर सकता है। इससे यह भी देखा जा सकता है कि चीन भारत में उत्पादित वैक्सीन की सफलता से भी चिढ़ गया है। इसलिए नए मुद्दों को जन्म दे रहा है।

गलवान वेली में हुई हिंसक झड़प में शहीद करनल संतोष बाबू को महावीर चक्र से सम्मानित कर भारत चीन को यह संदेश दे रहा है की गलवान में हुई हिंसक झड़प किसी युद्ध से कम नहीं है। साथ भारत के एयर चीफ मार्शल RKS भदौरिया ने कहा था कि अगर चीन आक्रामक हो सकता है तो भारत भी आक्रामक हो सकता है।

निष्कर्ष – इस प्रकार हम यह देख सकते है चीन के साथ हुए विवादों पर भारत सरकार ज्यादा कुछ कह नहीं रही है परंतु भारत चीन को किसी न किसी माध्यम से कड़ा संदेश भेज रहा है। भारत को इन मुद्दों को लेकर कुछ दीर्घकालिक उपाय करने की जरूरत है क्योंकि चीन भारत को किसी न किसी सीमा विवाद में उलझकर अपने दूसरे उद्देश्य पूरा करना चाहता है।

नाकुला पास नाकुला सिक्किम से उत्तरी छोर पर स्थित है। यह समुद्री ताल से 5000 मीटर की उचाई पर स्थित है। चीन की तरफ से यह क्षेत्र अत्यंत सुगम है वही भारत की और से यहाँ पर पहाड़ी क्षेत्र है। जिससे भारत के लिए यहाँ सड़के बनाना आसान नहीं है। जनवरी में यह क्षेत्र बर्फ से ढका रहता है। इसलिए चीन द्वारा इस समय यहाँ हस्तक्षेप करना चिंताजनक है। इससे पहले भी पिछले साल 2020 में नाकुला में हिंसक झड़प हुई थी।

सिक्किम का इतिहास

सिक्किम का एक राजनितिक अतीत है जिसमें कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं जो आदिवासी शासकों, ब्रिटिश सत्ता और इस राज्य के भारत में शामिल होने से जुड़ा हुआ है। इस राज्य में मोन, नाओंग और चांग का शासन था। यहां पर सबसे प्रमुख साम्राज्य चोग्याल का था।

1890 के दौर में सिक्किम ब्रिटिश इंडिया के अंतर्गत ‘प्रोटेक्टोरेट स्टेट’ बना। ‘प्रोटेक्टोरेट स्टेट’ मतलब कि सिक्किम की सुरक्षा अंग्रेजों के हाथ में चली गई। इसके बदले में अंग्रेजों को कुछ भाग पर कर लगाने का अधिकार था यह अंग्रेजों की उस नीति का भाग था, जिसमें चीन और ब्रिटिश इंडिया के बीच बफर स्टेट्स (दो बड़े राज्यों को टकराव से बचाने के लिए बीच में स्थापित छोटे देश) की स्थापना की गई, जिसमें नेपाल, भूटान और सिक्किम शामिल थे।

सिक्किम को ब्रिटेन से भारत की आजादी से पहले ही स्वायत्ता मिली हुई थी। सिक्किम में राजतंत्र था तथा वहां राजा चोग्याल का शासन था। 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो भारत के साथ सिक्किम की संधि हुई। जिसके अंतर्गत सिक्किम की रक्षा, संचार और विदेश मामले भारत की ओर से देखा जाना तय हुआ और सिक्किम की आजादी बरकरार रखी गई। सिक्किम का संरक्षण भारत के हाथों में 1947 के बाद आ गया था जिसमें भारत को सिक्किम की रक्षा, कूटनीति और संचार जैसी जरूरतों को पूरा करना था 1953 में चोग्याल को शासन में मदद करने के लिए एक स्टेट काउंसिल बनाई गई थी जो 1973 तक अपना काम करती रही स्टेट काउंसिल वहां की जनता स्वयं चुनती थी अर्थात यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया थी

भारत में सिक्किम राज्य का विलय

भारत और सिक्किम के बीच हस्ताक्षरित संधि ने सिक्किम की स्थिति को चोग्याल के साथ राजा के रूप में संरक्षित किया था। 1963 में ताशी नामग्याल की मृत्यु के बाद उनके बेटे पाल्डेन थोंडुप नामग्याल उनके उत्तराधिकारी बने। 1970 की शुरुआत तक राज्य में राजनीतिक उथल पुथल चलती रही जिसके कारण राजशाही को हटाने और लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना की मांग वहां की जनता उठाने लगी। अंत में 1973 में सिक्किम दरबार के खिलाफ व्यापक रूप से आंदोलन शुरू हो गया और इस प्रकार वहां पर प्रशासन का पूर्ण रूप से पतन हुआ।

भारत सरकार ने मुख्य प्रशासक श्री बी.एस.दास की नियुक्ति करके राज्य में समानता लाने की कोशिश की गई। राजनीतिक उथल पुथल की घटनाओं और चुनावों के कारण सिक्किम एक संरक्षक से एक सहयोगी राज्य में बदल गया। 4 सितंबर 1947 को सिक्किम कांग्रेस के नेता, काजी लेंडुप दोरजी को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में निर्वाचित किया गया था। हालांकि चोग्याल अभी भी संवैधानिक प्रमुख राजा के रूप में बने रहे। श्री बी.बी.लाल सिक्किम के पहले गवर्नर थे। चोग्याल और सरकार के बीच टकराव की ओर अग्रसर घटनाओं ने सिक्किम को 16 मई 1975 को भारतीय संघ का पूर्ण 22 वां राज्य बनने का कारण बना दिया। चोग्याल संस्थान को बाद में समाप्त कर दिया गया.

इस प्रकार 16 मई 1975 को सिक्किम औपचारिक रूप से भारतीय गणराज्य का 22 वां प्रदेश बना। सिक्किम को 35वें संविधान संशोधन से सह-राज्य के रूप में भारत का भाग बनाया गया और 36वें संविधान संशोधन से सिक्किम को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया.

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