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छठ पूजा 2020, जाने क्यूँ मनाई जाती है। जाने पूजा विधि व मान्यताएं

छट पूजा का त्योहार, उत्तर भारत के बिहार, पर्व की मान्यताएं क्या हैं।

छट पूजा उत्तर भारत के बिहार व कुछ अन्य राज्यों यानी पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड में मनाई जाती है । यह नेपाल में भी लोकप्रिय है। यह एक वैदिक पर्व है जो सूर्य देवता (भगवान सूर्य) और छठी मैया (देवी उषा का दूसरा नाम और भगवान सूर्य की बहन मानी जाने वाली) को समर्पित है।

Chat Puja
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इस त्योहार को ‘छठ’ कहा जाता है क्योंकि इसका मतलब हिंदी या नेपाली में 6 नंबर है। यह पर्व कार्तिका माह के छठे दिन मनाया जाता है। यानि की यह दिवाली के 6 दिन बाद आता है।

यह समारोह सूर्य देवता का धन्यवाद करते हुए 4 दिनों तक चलता है, जो सभी शक्तियों का स्रोत है । सूर्य भगवान के भक्त ने व्रती नामक व्रत का पालन करते हैं। छठ पूजा साल में दो बार होती है- एक बार गर्मी के दौरान और एक बार सर्दियों के दौरान।

कार्तिक मास के छठे दिन कार्तिक छठ मनाई जाती है जिसे कार्तिक शुक्ल षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह दिन हर साल अक्टूबर या नवंबर के दौरान आता है। गर्मियों में इसे होली के कुछ दिन बाद मनाया जाता है और इसे चैती छठ या चैत की छट के नाम से जाना जाता है।

अन्य हिंदू त्योहारों की तुलना में छठ पूजा के आसपास के अनुष्ठान को कठोर माना जाता है । इनमें निर्जला उपवास (पानी के बिना), नदियों/जल निकायों में डुबकी लगाना, पानी में खड़ा होना और प्रार्थनाएं करना, लंबे समय तक सूर्य का सामना करना और सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान सूर्य को ‘ प्रसाद ‘ चढ़ाना शामिल है । त्योहार के दौरान तैयार किए गए किसी भी भोजन में नमक, प्याज या लहसुन नहीं होना चाहिए।

4 दिनों में उत्सव

  • पहला दिन: नहाय खाय -इस पर्व की शुरुवात नहाए खाए से होती है। इसमें व्रत में व्रत करने वाले पहले पवित्र जल में स्नान करते हैं। नदी का जल घर लाकर खाने के ऊपर छिड़काव करके उसको(खाने को )शुद्ध करते हैं। इस दिन भोजन घर पर ही पकाया जाता है।
  • दूसरा दिन: लोहांडा और खरना- पूरे दिन निर्जला व्रत रखना पड़ता है। यह सूर्यास्त के बाद और प्रसाद (लोकप्रिय: खीर और चपाती) के साथ वर्त खोला जाता है। इसके बाद एक और व्रत अगले 36 घंटे तक बिना पानी के मनाना पड़ता है।
  • तीसरा दिन- संध्या अर्घ्य  प्रसाद(ठेकुआ, कसार, केला, नारियल और मौसम का फल इत्यादि) को घर पर तैयार कर शाम को नदी में ले जाकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। महिलाएं इस रस्म को अंजाम देते हुए हल्दी पीले रंग की साड़ी पहनती हैं। शाम को लोकगीत भी गायें जाते हैं।
  • चौथा दिन- उषा अराध्या – महोत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालु नदी किनारे उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दिन श्रद्धालु अपना 36 घंटे का व्रत अदरक और गुड खाकर खोलते हैं, जिसके परिणामस्वरूप महोत्सव पूर्ण हो जाता है। रिश्तेदार एक साथ प्रसाद बांटते हैं।

छठ पूजा का प्रसाद

चूंकि इस पर्व का विशेष महत्व है, इसलिए यहां चावल, ताजे फल, ड्राई फ्रूट्स, गेहूं, गुड़, मेवा, नारियल और घी के इस्तेमाल से प्रसाद(छट पूजा का) तैयार किया जाता है। ठेकुआ एक लोकप्रिय व्यंजन है जो गेहूं के आटे और गुड को देशी घी मे डाल के बनाई जाती है।

विभिन्न राज्यों में छठ पूजा

  • बिहार में छठ पूजा: छठ पूजा बिहारवासियों का मुख्य पर्व है। नालंदा के बकरगांव और पटना के उलार सूर्य मंदिर अपने छठ पर्व के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं।
  • उत्तर प्रदेश में छठ पूजा: उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मुख्य रूप से छठ पूजा मनाई जाती है। राज्य में त्योहार की पूर्व संध्या पर सार्वजनिक अवकाश मनाया जाता है।
  • मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में छठ पूजा: मध्य भारत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में भी छठ पूजा मनाई जाती है।

छठ पूजा देश में मनाए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण व और सबसे कठिन त्योहारों में से एक है। चार दिनों तक किया जाने वाला व्रत एक ऐसा अनुष्ठान है, जो महिलाओं द्वारा कड़ी भक्ति और श्रद्धा भाव से मनाया जाता है।

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