Economy

एक और बैंक फैल, जाने अब कौनसा बैंक और किस बैंक मे विलय

RBI लेता है बैंक विलय पर अंतिम निर्णय, NPA से परेशान लक्ष्मी विलास बैंक का हो सकता है DBS मे विलय।

RBI Bank
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विलय की दो असफल प्रयासों के बाद चेन्नई मुख्यालय वाले लक्ष्मी विलास बैंक को आखिरकार डीबीएस बैंक में नया अधिग्रहण(aquirer) मिल गया है। 566 शाखाओं वाले परेशान ऋणदाता का पूंजी पर्याप्तता अनुपात जून 2020 में 0.17 प्रतिशत तक गिर गया, जो की 9% था। बैंक के पास वित्त वर्ष 2019-20 के अंत में 21,443 करोड़ रुपये के बकाया ऋण और जमा राशि में 13,827 करोड़ रुपये थे।

एक सप्ताह पहले तक क्लिक्स ग्रुप(Clix Group) विलय की दौड़ में सबसे आगे था क्योंकि उसके प्रस्ताव पर आरबीआई और बोर्ड के साथ चर्चा चल रही थी। क्लिक्स ग्रुप ने इस साल जून में विलय मैदान में प्रवेश किया था । निजी क्षेत्र के बैंक के साथ इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस और इंडियाबुल्स वाणिज्यिक ऋण के स्वैच्छिक समामेलन के पहले के प्रयास भी विफल रहे क्योंकि आरबीआई इसके पक्ष में नहीं था।

बैंकिंग क्षेत्र में विलय के लिए अंतिम निर्णय हमेशा आरबीआई का होता है क्योंकि नियामक चाहता है कि एक मजबूत इकाई में कदम रखें । पिछले दो विलयों में से एक में आरबीआई(RBI) के पास विफल आईडीबीआई बैंक(IDBI Bank) के लिए बहुसंख्यक साझेदार के रूप में एलआईसी(LIC) था। इसी तरह केंद्रीय बैंक यस बैंक(Yes Bank) को बचाने के लिए एसबीआई और बड़े निजी बैंकों का एलान लेकर आया था।

Clix समूह वास्तव में पिछले कुछ महीनों में एक धन उगाहने वाले होड़ पर था । इसने एक प्राइवेट लिमिटेड फर्म से अपनी हाउसिंग आर्म को भी लिमिटेड में बदल दिया था, जो कंपनी के लिए ज्यादा फंडिंग के विकल्प देता है।

क्लिक्स ग्रुप के प्रस्ताव में क्लिक्स कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड, क्लिक्स फाइनेंस इंडिया और क्लिक्स हाउसिंग फाइनेंस का संघर्षरत बैंक के साथ विलय शामिल था जिसका मार्केट कैप 600 करोड़ रुपये से अधिक है। बैंक ने 2019-20 में 2,200 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया।

पिछले पार्टनर के लिए बड़ा मुद्दा लोन के मुकाबले फिक्स्ड डिपॉजिट(FD) का एडजस्टमेंट(adjustment) भी था। तीन साल पहले बैंक ने इसी समूह को बैंक द्वारा दिए गए कर्ज के एवज में रेलिगेयर ग्रुप की कंपनियों के 794 करोड़ रुपये जमा कराए थे। जमा को समायोजित करने के इस मुद्दे का पहले से ही रेलिगेयर फेइन्वेस्ट द्वारा विरोध किया जाता है।

हालांकि बैंक इसे कानूनी रूप से तर्कसंगत होने का दावा करता है, लेकिन आरबीआई ने बैंक को संभावित नुकसान को कवर करने के लिए प्रावधान करने की सलाह दी थी। मामला पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है।

नए अधिग्रहण डीबीएस बैंक को भविष्य में ऋण हानि को अवशोषित करने के लिए अतिरिक्त पूंजी लानी होगी। पिछले तीन साल से घाटे की वजह से लक्ष्मी विलास बैंक को पूंजी की तत्काल जरूरत है। बैंक का घाटा 2017-18 में 585 करोड़ रुपये से उछलकर 2019-20 में 836 करोड़ रुपये हो गया। इसी अवधि में बैंक का सकल एनपीए 25.39 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

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