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भारत से भेजे गए शहद के सभी Sample फैल, कहीं आपका शहद भी तो नहीं बेकार

भारत में शहद को प्राचीन काल से इस्तेमाल किया जा रहा है। बीमार लोग ठीक होने के लिए इस्तेमाल करते हैं, पर कहीं और ज्यादा बीमार तो नहीं कर रहा शहद।

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Honey

शहद को चीनी के स्थान पर एक बेहतरीन विकल्प के रूप में भी देखा जाता है साथ ही इसके औषधिय गुण अनेक रोगों, त्वचा संबंधी परेशानियों तथा रोग प्रतिरोधकता क्षमता मे विशेष रूप से सहायक है।

विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (CSE) द्वारा किये गए परमाणु चुंबकीय अनुनाद (Nuclear Magnetic Resonance) परीक्षण में 13 में से 10 ब्रांडों के नमूने फेल हो गए

विज्ञान और पर्यावरण केंद्र (Centre for Science and Environment) द्वारा की गई एक जाँच से भारत में कई प्रमुख ब्रांडों द्वारा बेचे जाने वाले शहद में चीनी के सिरप की मिलावट के बारे में पता चला है। डाउन टू अर्थ(Down to Earth) रिपोर्ट के अनुसार, शहद दुनिया का सब से मिलावटी खाद्य पदार्थ है। मिलावट का यह व्यापार दिनोंदिन बढ़ रहा है। भारत में FSSAI नियमित रूप से शहद सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों का परीक्षण करता रहता है। लेकिन शहद की मिलावट में अब ऐसी तकनीक इस्तेमाल की जा रही है कि यह FSSAI द्वारा तय किए गए मानकों को भी बाइपास कर देते हैं।

क्या होता है शहद?

खाद्य एवं कृषि संगठन(Food And Agriculture Organization) की कोडेक्स अलीमेंटरीयस कमीशन के अनुसार, शहद एक प्राकृतिक मधु सार तत्व है जो मधुमाखियों द्वारा बनाया जाता है जिसे मधुमक्खियाँ पेड़ पौधों से एकत्रित किए गए नेक्टर को अपने हनी कोंब में एकट्ठा करती हैं जहां पर वह शहद बन जाता है। इस प्रकार शहद एक प्राकृतिक खाद्य पदार्थ है।

भारत में शहद की मिलावट व्यापक स्तर पर हो रही है। जून 2020 में, FSSAI(Food Safety and Standards Authority of India) विभिन्न राज्यों के फूड सैफ्टी कमिश्नर से शहद की मिलावट की और ध्यान देने को कहा था मसलन शहद के ज्यादा से ज्यादा सैम्पल इकट्ठा करने, तथा उसमें गोल्डन सिरप, इन्वर्ट सिरप, तथा राइस सिरप की जांच करना।

चीन से आयात किए जाते हैं मिलावटी घटक

आश्चर्यजनक बात यह है की इन सब मिलावटी घटकों का आयात चीन से किया जाता है। CSE ने अपनी जाँच में चीन के ऐसे कई वेब पोर्टल्स का पता लगाया जो फलों के रस से निर्मित ऐसे चीनी सिरप का प्रचार कर रहे थे, जिसे मिलावट के परीक्षण के दौरान पकड़ना काफी मुश्किल होता है।चीन की कंपनियों ने CSE को सूचित किया कि भले ही शहद में 50 से 80 प्रतिशत तक मिलावट क्यों न की जाए वह शहद फिर भी भारतीय नियमों के तहत निर्धारित मानकों पर खरा उतरेगा और परीक्षण में सफल हो जाएगा। मौजूदा भारतीय नियमों के मुताबिक, शहद के परीक्षण के दौरान यह जाँच की जाती है कि शहद में C4 चीनी (गन्ने से प्राप्त चीनी) या C3 चीनी (चावल से प्राप्त चीनी) के साथ मिलावट की गई है अथवा नहीं।

साथ ही साथ डाउन तो अर्थ की रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है की चीन से 166 फ्रूकटोज की शिपमेन्ट आई है जिसके 100 से ज्यादा खरीददार पंजाब में, लगभग 30 दिल्ली NCR में, तथा 15 उत्तराखंड से हैं।

प्रभाव

इसका सबसे पड़ा प्रभाव ग्राहकों तथा मधुममक्खी पालकों पर पड़ता है। यह नकली शहद बाजार में बहुत सस्ता मिलता है जबकि असली शहद अपेक्षाककृत महँगा होता है। 2015 से लगातार शहद के दाम घट रहे है इससे यह बात सामने आती है की 2015 से यह मिलावट का खेल चल रहा है।

दूसरा प्रभाव इसका सेवन करने वाले लोगों पर पड़ता है इस जाँच के अनुसार, बाज़ार में बिकने वाले अधिकांश शहद में चीनी की मिलावट की जाती है। इसलिये शहद के बजाय लोग अधिक चीनी खा रहे हैं,जो मधुमेह के रोगियों के लिए विष का काम करेगा साथ ही यह कोविड-19 के जोखिम के साथ ही मोटापे के को भी बढ़ाएगा।

क्या करना चाहिए?

सरकार को बेहतरीन जांच तकनीकों को लाने की आवश्यकता है। साथ ही चीन से आयात किए जा रहे इस प्रकार के मिलावटी घटकों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना चाहिए। हमारे देश की कॉम्पनियों को भी एपीकल्चर द्वारा प्राप्त प्राकृतिक शहद पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए जिससे मधुमक्खी पालकों की स्थिति को भी सुधारा जा सके।

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